नीमच में मंगलवार को एक किसान अपनी बंजर होती जमीन और दूषित होते पानी की शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। कलेक्टर की जनसुनवाई में पर्यावरण और किसानों की आजीविका से जुड़ा यह गंभीर मामला सामने आया, जिसने स्थानीय प्रशासन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। जीरन क्षेत्र के किसान भोपाल सिंह ने एक विस्तृत आवेदन के माध्यम से अपनी व्यथा सुनाई। उनका आरोप है कि उनके खेत के पास संचालित एक फैक्ट्री से लगातार निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट उनकी कृषि भूमि को तबाह कर रहा है। यह धीमा जहर उनकी उपजाऊ जमीन में घुलता जा रहा है, जिससे उनकी खेत की उर्वरता लगातार खत्म होती जा रही है और कभी हरी-भरी फसलें देने वाली धरती अब धीरे-धीरे बंजर बनने लगी है।
किसान भोपाल सिंह ने बताया कि इस रासायनिक अपशिष्ट का दुष्प्रभाव केवल उनकी जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने आसपास के जल स्रोतों को भी दूषित कर दिया है। कुओं और तालाबों का पानी अब पीने या सिंचाई के लायक नहीं बचा है, जिससे न केवल खेती पर सीधा असर पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों और वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उनका दावा है कि इस प्रदूषण के कारण वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हवा में एक अजीब सी रासायनिक गंध घुल गई है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस बढ़ते प्रदूषण के कारण क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं, जो आम जनता के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकता है।

दूषित पानी से वन्यजीवों की मौत का दावा
भोपाल सिंह ने अपने आवेदन में एक और हृदय विदारक आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दूषित पानी के कारण जंगली पशुओं की मौत तक हो चुकी है। यह तथ्य इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा देता है, क्योंकि यह केवल मानव स्वास्थ्य या कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है। जहरीला पानी पीकर कई वन्यजीवों ने अपनी जान गंवाई है, जो पर्यावरण संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा है।
पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग
किसान ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की भी अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसी भयावह स्थिति उत्पन्न न हो। इसके साथ ही, भोपाल सिंह ने नियमानुसार संबंधित फैक्ट्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की भी मांग की है, ताकि अन्य किसानों को भी ऐसी ही त्रासदी का सामना न करना पड़े और पर्यावरण को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके। यह मामला अब प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा हो गया है कि वह कैसे किसानों की आजीविका और पर्यावरण की रक्षा करता है।






