बच्चों को बचाने आगे आईं कंचन बाई, मधुमक्खियों के हमले में चली गई जान

नीमच के आंगनबाड़ी केंद्र पर मधुमक्खियों के हमले के दौरान कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को बचाया। बच्चों को सुरक्षित निकालते समय उन्हें गंभीर डंक लगे और अस्पताल पहुंचने से पहले उनका निधन हो गया।
Kanchan Bai

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में हुई एक घटना ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। आंगनबाड़ी केंद्र में खेल रहे मासूम बच्चों पर अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। बच्चे चीखने लगे और वहां अफरा-तफरी मच गई। लेकिन उसी समय पास में मौजूद एक महिला ने बिना अपनी जान की परवाह किए बच्चों को बचाने का फैसला किया।

यह महिला थीं कंचन बाई मेघवाल। उन्होंने बच्चों को बचाने के लिए खुद को खतरे में डाल दिया। दरी और कंबल से बच्चों को ढककर सुरक्षित जगह पहुंचाया, लेकिन इस दौरान मधुमक्खियों ने उन्हें बुरी तरह काट लिया। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

आंगनबाड़ी केंद्र पर अचानक हुआ मधुमक्खियों का हमला

घटना सोमवार सुबह की बताई जा रही है। नीमच जिले के एक गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चे रोज की तरह खेल रहे थे। आंगनबाड़ी सहायिका कुछ बच्चों को लेने बाहर गई हुई थीं। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों का बड़ा झुंड वहां आ पहुंचा और बच्चों पर हमला करने लगा। छोटे-छोटे बच्चे डर के मारे रोने लगे और भागने लगे। लेकिन इतनी छोटी उम्र के बच्चों के लिए खतरे से खुद को बचाना मुश्किल था। गांव वालों के अनुसार स्थिति कुछ ही मिनटों में बहुत खतरनाक हो गई थी।

पास ही थीं कंचन बाई

आंगनबाड़ी केंद्र के पास ही कंचन बाई मेघवाल का घर था। उस समय वे हैंडपंप पर कपड़े धो रही थीं। जैसे ही उन्होंने बच्चों की चीखें सुनीं वे तुरंत समझ गईं कि कुछ गंभीर हुआ है। उन्होंने बिना समय गंवाए घर से दरी और कंबल उठाए और सीधे आंगनबाड़ी केंद्र की ओर दौड़ पड़ीं। वहां पहुंचकर उन्होंने बच्चों को दरी और कंबल से ढककर सुरक्षित करने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने बच्चों के चारों ओर घेरा बनाकर उन्हें मधुमक्खियों से बचाया और धीरे-धीरे वहां से दूर सुरक्षित जगह ले गईं।

बच्चों को बचाते-बचाते खुद हो गईं गंभीर घायल

बच्चों को सुरक्षित निकालने के दौरान मधुमक्खियों का पूरा झुंड कंचन बाई पर टूट पड़ा। उन्हें कई जगहों पर डंक लगे। इसके बावजूद उन्होंने बच्चों को पहले सुरक्षित बाहर पहुंचाया। इस बीच आसपास के ग्रामीण भी मदद के लिए पहुंच गए। कंचन बाई की हालत बिगड़ती देख तुरंत डायल 112 को सूचना दी गई और उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष थीं कंचन बाई

कंचन बाई सिर्फ एक गृहिणी नहीं थीं, बल्कि गांव में स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष भी थीं। वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती थीं और गांव के सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहती थीं। लोग बताते हैं कि उन्होंने कई परिवारों की मदद की थी और गांव में उनका सम्मान था। उनकी अचानक हुई मौत से गांव की महिलाएं भी बेहद दुखी हैं।

पुलिस ने क्या कहा?

सरवानिया महाराज चौकी प्रभारी एसआई नीलेश सोलंकी ने बताया कि कंचन बाई के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया था। मंगलवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Bhawna Choubey
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