नीमच में पहली बार आर्यावर्त षड्दर्शन साधु मंडल भारत के राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन हुआ, जिसमें देश के 22 राज्यों से 500 से अधिक संत, नागा साधु, अखाड़ों के प्रतिनिधि और मठाधीश शामिल हुए। शोभायात्रा के बाद टाउन हॉल में हुए राष्ट्रीय संत सम्मेलन में मठ-मंदिरों के संचालन, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। वहीं राष्ट्रीय संत सम्मेलन में जगद्गुरु रामानंदाचार्य वैदेही वल्लभाचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी मठ-मंदिरों को कलेक्टर व्यवस्थापन से आजादी नहीं मिली है।
दरअसल उन्होंने कहा कि मंदिरों की कृषि भूमि पर अतिक्रमण के कारण पुजारी और महंत परेशान हैं। उन्होंने विधायकों से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने यह विषय उठाने की बात कही। सम्मेलन में ‘ज्ञान, गंगा, गगन और गौ’ को प्रमुख विषय बनाया गया और जल संरक्षण, गौसेवा तथा सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया।
राष्ट्रीय संत सम्मेलन में मठ-मंदिरों से जुड़े कई मुद्दे उठे
सम्मेलन में विभिन्न संतों और महंतों ने मठ-मंदिरों के संचालन और उनकी संपत्तियों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। जगद्गुरु वैदेही वल्लभाचार्य ने कहा कि मठ-मंदिरों को बेचने से रोकने के लिए कानून बनाया जाए और उनकी कृषि भूमि से होने वाली आय का उपयोग पूजा-अर्चना और रखरखाव में किया जाए। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा के प्रमाणीकरण और बच्चों के लिए धार्मिक संस्कार प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की भी बात कही।

वहीं प्रदेश अध्यक्ष महंत जितेंद्र दास ने कहा कि हिंदू मठ-मंदिरों को कलेक्टर व्यवस्था से मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने गौ माता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने और संतों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग रखी। राष्ट्रीय अध्यक्ष राम भूषण दास महाराज ने कहा कि संतों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। वहीं राष्ट्रीय प्रवक्ता रामेश्वर दास महाराज ने कहा कि देश के करीब 52 हजार मठ-मंदिर उपेक्षा का सामना कर रहे हैं और पुजारियों को किसानों की तरह सुविधाएं मिलने की बात कही।

कार्यक्रम में मौजूद रहे जनप्रतिनिधि
दरअसल राष्ट्रीय संत सम्मेलन से पहले माहेश्वरी भवन से टाउन हॉल तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा जैन भवन मार्ग, 40 नंबर चौराहा, टैगोर मार्ग, कमल चौक, फव्वारा चौक, नया बाजार, घंटाघर और अन्य प्रमुख मार्गों से होकर टाउन हॉल पहुंची। शोभायात्रा में नागा साधु, विभिन्न अखाड़ों के संत, मठ-मंदिरों के पुजारी, रथ-बग्गियां और बैंड-बाजे शामिल रहे। रास्ते में कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर संतों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में विधायक दिलीप सिंह परिहार ने कहा कि पुजारियों की समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने ऐसे सम्मेलनों को लगातार आयोजित करने की बात कही। महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति शिव शंकर मिश्रा ने कहा कि संत समाज वेद-उपनिषदों और भारतीय संस्कृति के प्रचार में भूमिका निभा रहा है तथा बच्चों को शास्त्र अध्ययन के लिए विश्वविद्यालयों में भेजने की बात कही। सम्मेलन में पायलट बाबा आश्रम के महंत योगीराज रंजन स्वामी सहित अनेक संत-महंत मौजूद रहे, जबकि संचालन साध्वी जयमाला बैरागी और राहुल दास बैरागी ने किया।






