
नीमच के चीताखेड़ा क्षेत्र के बिसलवास कलां में मेंटेनेंस के दौरान करंट लगने से आउटसोर्स कर्मचारी प्रताप सिंह की मौत के बाद मामला गरमा गया है। परिजन और ग्रामीण विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय के सामने मुख्य सड़क पर शव रखकर धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि शटडाउन का समय पूरा होने से पहले ही हाईटेंशन लाइन चालू कर दी गई। करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुरा भी धरने में पहुंचे और दोषियों पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग की।
दरअसल बिसलवास कलां में बिजली लाइन के मेंटेनेंस के दौरान प्रताप सिंह खंभे पर काम कर रहे थे। इसी दौरान हाईटेंशन लाइन में करंट दौड़ गया और वह इसकी चपेट में आ गए। करंट लगने के बाद प्रताप सिंह खंभे से नीचे गिर गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए और शव को विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर रखकर धरने पर बैठ गए।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि लाइन को दोपहर 3 बजे तक बंद रखने का शटडाउन परमिट लिया गया था, लेकिन करीब 2:30 बजे ही बिना सूचना लाइन चालू कर दी गई। उनका कहना है कि इसी वजह से प्रताप सिंह करंट की चपेट में आए। रातभर परिजन और ग्रामीण शव के पास बैठे रहे। इस दौरान सड़क पर शव के पास दीया जलाकर भी विरोध जताया गया।
जीवन सिंह शेरपुरा धरने में पहुंचे
वहीं मामले की जानकारी मिलने के बाद करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुरा भी धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों के साथ बैठकर मामले में कार्रवाई की मांग की। शेरपुरा ने घटना को सामान्य हादसा मानने से इनकार करते हुए इसे हत्या बताया। उनका आरोप है कि लाइन चालू करने से पहले फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की संख्या और अटेंडेंस की जांच नहीं की गई। जीवन सिंह शेरपुरा ने दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में FIR दर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा और एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी गई है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक शव नहीं उठाया जाएगा। मृतक के परिजन महेंद्र सिंह शक्तावत ने भी शटडाउन के बावजूद समय से पहले लाइन चालू किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रताप सिंह परिवार में कमाने वाले सदस्य थे और उनके जाने से परिवार के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। परिजनों ने कहा है कि केवल आश्वासन से धरना खत्म नहीं होगा।
विद्युत वितरण कंपनी ने कहा- तकनीकी जांच के बाद होगी कार्रवाई
दरअसल धरने और विरोध के बीच विद्युत वितरण कंपनी के कार्यपालन यंत्री महिप सोनी ने मामले में कंपनी का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि दुर्घटना की सूचना 3 से 3:30 बजे के बीच मिली थी। उस समय 11 और 33 केवी लाइन के मेंटेनेंस का काम चल रहा था। महिप सोनी के मुताबिक परमिट प्रक्रिया और लाइन चालू होने के वास्तविक कारण की तकनीकी जांच की जा रही है। इसके लिए स्मार्ट मीटर डेटा, लाइन पेट्रोलिंग और लॉग शीट को जांच में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कंपनी की ओर से शासन के नियमों के तहत सहायता राशि उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
कमलेश सारडा, नीमच
30 वर्षों से रिपोर्टिंग; दैनिक भास्कर, बंसल न्यूज, पत्रिका और द सूत्र के साथ कार्य.

