नीमच जिले के सिंगोली में सड़क हादसे के बाद घायल मां-बेटे की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल परिजनों का आरोप है कि समय पर ऑक्सीजन और लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस नहीं मिलने से दोनों की रास्ते में मौत हो गई। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने इलाज में किसी तरह की लापरवाही से इनकार करते हुए कहा है कि मरीजों को समय पर प्राथमिक उपचार और रेफरल दिया गया था।
दरअसल दुर्घटना में सिंगोली निवासी मनीष जैन और उनकी माता लाड बाई गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिंगोली ले जाया गया था जहां से हालत गंभीर होने पर दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि रेफरल तो कर दिया गया, लेकिन सरकारी एंबुलेंस और ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूरी में उन्हें निजी वाहन से ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद पूरे इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नाराजगी बढ़ गई है और लोगों ने आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग उठाई है।

परिजनों ने क्या आरोप लगाए?
वहीं मृतक मनीष जैन के ससुराल पक्ष ने इस मामले को स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी नाकामी बताया है। उनके साले प्रमोद जैन का कहना है कि दुर्घटना के बाद सबसे अहम समय में मरीजों को लाइफ सपोर्ट सुविधा नहीं मिली। उनका आरोप है कि यदि ऑक्सीजन सिलेंडर और पैरामेडिकल स्टाफ वाली एंबुलेंस समय पर उपलब्ध होती तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सिंगोली राजस्थान के कोटा के काफी करीब है लेकिन गंभीर मरीजों को पहले नीमच भेजा जाता है। उनके मुताबिक यदि नीमच में भी बेहतर इलाज उपलब्ध नहीं है और बाद में मरीजों को दूसरे राज्यों में रेफर करना पड़ता है तो शुरुआती रेफरल को लेकर स्पष्ट नीति क्यों नहीं बनाई जाती। हालांकि परिजनों ने इस मामले में जिला प्रशासन, मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत करने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
जानिए अस्पताल प्रबंधन ने क्या कहा?
दरअसल अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। सिंगोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार दुर्घटना के बाद मरीजों का तत्काल परीक्षण किया गया और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार प्राथमिक उपचार दिया गया। अस्पताल का कहना है कि मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए बिना अनावश्यक देरी के उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया और उपचार संबंधी सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं। अस्पताल ने यह भी कहा कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार जरूरी चिकित्सा सहायता देने में कोई जानबूझकर लापरवाही नहीं हुई।
कमलेश सारडा की रिपोर्ट


