मालवा के अफीम किसानों की चिंता दूर, सीपीएस डोड़ों की कटाई को हरी झंडी, सांसद ने किसानों की ईमानदारी पर जताया भरोसा

किसानों की ईमानदारी पर पूर्ण भरोसा जताते हुए सांसद गुप्ता ने कहा कि अफीम किसान पूरी प्रामाणिकता और ईमानदारी से काम करते हैं, इसलिए कटाई जैसे हर काम में सरकार का सीधा दखल आवश्यक नहीं है।
Harvesting of CPS pods

Harvesting of CPS pods

मालवा अंचल के अफीम उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। नीमच-मंदसौर संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता ने अफीम किसानों, विशेषकर ‘सीपीएस (CPS) पद्धति’ (बिना चीरा लगाए अफीम की खेती) से जुड़े किसानों के लिए फसल कटाई को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। होली के महापर्व पर क्षेत्र के अन्नदाताओं को शुभकामनाएं देते हुए सांसद ने ऐलान किया है कि जिन किसानों के खेतों में अफीम के डोड़े सूख चुके हैं, वे अब बिना किसी विभागीय इंतजार के उन्हें निकाल सकते हैं और उनमें से खसखस (पोस्तादाना) प्राप्त कर सकते हैं।

सांसद सुधीर गुप्ता ने अपने जारी वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि किसान इस बात के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं कि वे डोड़ों से खसखस निकालने का काम सीधे अपने खेत पर ही करें या फिर डोड़ों को घर ले जाकर यह प्रक्रिया पूरी करें। इस घोषणा से क्षेत्र के उन हजारों अफीम किसानों की बड़ी चिंता दूर हो गई है, जो फसल सूखने के बाद कटाई और खसखस निकालने को लेकर नारकोटिक्स विभाग के स्पष्ट निर्देशों की बाट जोह रहे थे। अब किसान बेझिझक अपने खेतों से डोड़े निकालने का काम शुरू कर सकते हैं।

कैम्प लगाकर नारकोटिक्स विभाग लेगा डोड़े 

इस बड़ी छूट के साथ ही किसानों को एक महत्वपूर्ण हिदायत भी दी गई है। खसखस का दाना निकालने के बाद किसानों को बचे हुए खाली सूखे डोड़ों को पूरी तरह से सुरक्षित अपने पास रखना होगा। सांसद ने आगामी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया कि आने वाले समय में जब सरकार और नारकोटिक्स अमला निर्धारित कैंप लगाकर डोड़ों की मांग करेगा और इसके लिए निश्चित तारीखें तय करेगा, तब किसानों को उन तौल केंद्रों पर जाकर अपना सुरक्षित रखा डोड़ा तुलवाकर विभाग को सौंपना होगा।

किसानों की ईमानदारी पर जताया भरोसा 

किसानों की ईमानदारी पर पूर्ण भरोसा जताते हुए सांसद गुप्ता ने कहा कि अफीम किसान पूरी प्रामाणिकता और ईमानदारी से काम करते हैं, इसलिए कटाई जैसे हर काम में सरकार का सीधा दखल आवश्यक नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि क्षेत्र के किसान पूरी जिम्मेदारी के साथ खसखस निकालने और सरकारी तौल के लिए डोड़ा सुरक्षित रखने का काम करेंगे। जानकारों का मानना है कि सांसद की इस त्वरित पहल से किसानों को बड़ी सहूलियत मिलेगी और विभागीय लेटलतीफी या मौसम की मार के कारण खेतों में खड़ी फसल के खराब होने का डर भी खत्म हो जाएगा।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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