मध्य प्रदेश और राजस्थान के मालवा-मेवाड़ अंचल के लाखों अफीम किसानों का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त होने जा रहा है। खबर है कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) द्वारा बहुप्रतीक्षित अफीम नीति 2026-27 जारी कर दी गई है। हालांकि नीति की आधिकारिक कॉपियाँ अभी सीबीएन की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड होने की प्रक्रिया में हैं, लेकिन इसकी घोषणा के साथ ही दोनों राज्यों के किसान बहुल इलाकों में जश्न और राहत का माहौल है।
इस बार किसानों को नीति का यह इंतजार पिछले साल के मुकाबले करीब 40 दिन की देरी से खत्म हुआ है। नीति आने में हो रही लगातार देरी के कारण अंचल में किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों की सुगबुगाहट भी तेज हो गई थी, लेकिन अब इस बड़े ऐलान और संभावित राहत भरे प्रावधानों ने तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी ने भी इस संबंध में जानकारी साझा कर किसानों को बधाई दी है।
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नीति के मुख्य संभावित प्रावधान और हाइलाइट्स
अंचल में चर्चाओं और संभावित प्रस्तावों के आधार पर इस नई नीति में किसानों के लिए कई बड़े और राहत भरे प्रावधान सामने आ रहे हैं
- 10 हजार नए पट्टों की संभावना: इस बार की नीति में लगभग 10 हजार नए पट्टे जारी किए जाने की मजबूत संभावना जताई जा रही है, जिससे नए और युवा किसानों को भी अफीम की खेती से जुड़ने का बड़ा अवसर मिलेगा।
- 4.4 मार्फिन एवरेज पर 10 आरी का पट्टा: चर्चा के मुताबिक, जिन किसानों का मार्फिन एवरेज 4.4 तक है, उन्हें 10 आरी (10 aari) के पट्टे दिए जा सकते हैं।
- CPS पद्धति के तहत 5 आरी के पट्टे: सीपीएस पद्धति के अंतर्गत किसानों को 5 आरी (5 aari) के पट्टे मिलने की संभावना है, जिससे रकबे और उत्पादन का दायरा बढ़ेगा।
लाखों परिवारों को मिलेगा सीधा आर्थिक संबल
आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो मध्य प्रदेश और राजस्थान (तथा उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों) के लगभग 1.20 लाख से अधिक पात्र किसान इस लाइसेंसिंग प्रक्रिया के दायरे में आते हैं। यदि पट्टाधारक किसानों के परिवारों को जोड़ा जाए, तो इस नीति से मध्य प्रदेश और राजस्थान के करीब 6 से 7 लाख ग्रामीण परिवार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त करते हैं।
खेतों में शुरू हुई जुताई और बुवाई की तैयारी
नारकोटिक्स विभाग की ओर से हरी झंडी मिलने और नीति का रास्ता साफ होने के बाद अब मध्य प्रदेश के नीमच, मंदसौर, रतलाम तथा राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ व झालावाड़ जिलों के पट्टाधारक किसानों ने राहत की सांस ली है। नीति की आधिकारिक प्रतियाँ पोर्टल पर आने की प्रक्रिया के बीच किसानों ने अब बिना वक्त गंवाए अपने खेतों की जुताई और अफीम की बुवाई के मुख्य कार्यों को पूरी रफ्तार से शुरू कर दिया है।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
