नीमच: सीपीएस पद्धति के तहत अफीम डोडा तौल का दूसरा चरण शुरू, 5 आरी के पट्टेधारी किसान कर रहे डोडा जमा

नारकोटिक्स विभाग द्वारा तौल केंद्रों पर एकत्रित किए जा रहे इन डोडों को कड़ी सुरक्षा के बीच सीधे स्थानीय स्तर पर स्थापित सीपीएस प्लांट और सरकारी अफीम फैक्ट्री भेजा जाएगा। फैक्ट्री में इन डोडों से वैज्ञानिक प्रक्रिया (अल्कलॉइड एक्सट्रैक्शन) के तहत मॉर्फिन और अफीम निकाली जाएगी।
Neemuch second phase of opium poppy weighing

Neemuch second phase of opium poppy weighing

अफीम उत्पादक किसानों के लिए अफीम तौल का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अब दूसरे चरण की शुरुआत हो गई है। नारकोटिक्स विभाग के सख्त निर्देशन में सीपीएस (कंसंट्रेट ऑफ पॉपी स्ट्रॉ) पद्धति के तहत अफीम डोडा जमा करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। तौल केंद्रों पर किसानों की चहल-पहल देखी जा रही है और तौल प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी वर्ष 2025-26 की अफीम नीति के अनुसार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को मिलाकर कुल लगभग 1.21 लाख किसानों को अफीम की खेती के लिए लाइसेंस दिए गए हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश के किसानों का होता है। सीपीएस पद्धति के तहत उन किसानों को शामिल किया गया है जिनकी पूर्व में अफीम उपज 3.0 किलोग्राम से 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच रही थी। इन किसानों को 5-5 आरी (0.05 हेक्टेयर प्रति किसान) के पट्टे जारी कर बिना चीरे वाले डोडे की खेती का अधिकार दिया गया है।

डोडों में सुरक्षित है अफीम की मात्रा

जानकारी के अनुसार तौल केंद्रों पर जो डोडे जमा किए जा रहे हैं, उनका आकार करीब 6 इंच का है। इन डोडों को तोड़कर किसानों द्वारा पहले ही पोस्ता दाना (खसखस) निकाल लिया गया है। पोस्ता दाना निकालने के बावजूद ये डोडे पूरी तरह खाली नहीं हैं। चीरा न लगने के कारण इन डोडों के छिलके में अफीम की पूरी मात्रा सुरक्षित मौजूद है, जिसका सीपीएस पद्धति के तहत सीधा उपयोग किया जाएगा।

सीपीएस प्लांट में निकलेगी मॉर्फिन

नारकोटिक्स विभाग द्वारा तौल केंद्रों पर एकत्रित किए जा रहे इन डोडों को कड़ी सुरक्षा के बीच सीधे स्थानीय स्तर पर स्थापित सीपीएस प्लांट और सरकारी अफीम फैक्ट्री भेजा जाएगा। फैक्ट्री में इन डोडों से वैज्ञानिक प्रक्रिया (अल्कलॉइड एक्सट्रैक्शन) के तहत मॉर्फिन और अफीम निकाली जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य औषधीय उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली मॉर्फिन प्राप्त करना है।

तौल केंद्रों पर चाक-चौबंद व्यवस्था

वर्तमान में नीमच के तौल केंद्रों पर विभाग द्वारा पूरी व्यवस्था चाक-चौबंद रखी गई है। अधिकारी हर एक प्रक्रिया पर पैनी नजर रखे हुए हैं। किसान अपने पट्टों और निर्धारित तारीखों के अनुसार तौल केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं, जिससे तौल प्रक्रिया बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रही है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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