MP का नीमच जिला हमेशा ही सुर्खियों में बना रहता है। इसी कड़ी में एक बारे फिर जावद विधानसभा क्षेत्र में 9 सितंबर से “प्रोजेक्ट दीप” शुरू होने जा रहा जा रहा है, जिससे बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिलेगी। यह अनोखी पहल खासतौर पर उन बच्चों के लिए है, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और पढ़ाई के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का सपना देखते हैं।
इस प्रोजेक्ट के तहत, क्लास 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले करीब 1500 विद्यार्थियों को एक साल तक नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। बता दें कि कक्षाएं स्कूल परिसर में ही लगेंगी, जिससे बच्चों को अतिरिक्त बोझ या परेशानी नहीं होगी।
आत्मनिर्भर बनाना मुख्य उद्देश्य
विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे आगे चलकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें। प्रोजेक्ट दीप में विद्यार्थियों को तीन प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। पहला सूचना प्रौद्योगिकी (IT), जिसमें प्रोग्रामिंग, डेटा एनालिसिस और डिजिटल स्किल्स सिखाई जाएंगी। दूसरा खेती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जिसमें बताया जाएगा कि स्मार्ट खेती कैसे की जा सकती है और आधुनिक तकनीक के साथ-साथ एआई का उपयोग किस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है। तीसरा स्पोकन इंग्लिश, जिससे बच्चे आत्मविश्वास के साथ इंग्लिश बोल और समझ सकें।
जावद स्थित सांदीपनि विद्यालय में जावद विधानसभा के शासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक कर 9 सितंबर से शुरू होने जा रहे हमारे महत्वाकांक्षी नवाचार “प्रोजेक्ट दीप (DEEP)” के विषय में विस्तृत चर्चा की। pic.twitter.com/yCf26gVJt5
— Omprakash Sakhlecha (@opsakhlecha) September 6, 2025
MKCL करेगी संचालन
इस प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र नॉलेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (MKCL) संचालित करेगी। यह संस्था पहले भी करोड़ों विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध करा चुकी है। वैज्ञानिक और सुपर कंप्यूटर के जनक माने जाने वाले पद्म विभूषण विजय भटकर भी इसके मार्गदर्शकों में शामिल हैं।
बच्चों को होगा फायदा
विधायक सखलेचा का कहना है कि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और जावद भी इसमें अपना योगदान देगा। प्रोजेक्ट दीप के जरिए हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल करें और खुद को दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत कर सकें। इससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को विश्वस्तरीय कौशल सीखने का मौका होगा।
कमलेश सारडा, नीमच






