सुखानंद तीर्थ स्थल पर प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम, झरने के तेज बहाव ने बढ़ाया आकर्षण

यह क्षेत्र न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि मॉनसून के दौरान यह पर्यटन स्थल भी बन जाता है। यहां की हरी-भरी वादियाँ, चट्टानों पर गिरता पानी, और मंदिर परिसर की पवित्रता लोगों को अपनी ओर खींच लाती है।
Sukhanand pilgrimage site Neemuch

नीमच जिला मुख्यालय से कुछ किलोमीटर दूर स्थित सुखानंद तीर्थ स्थल इन दिनों वर्षा ऋतु में अपनी प्राकृतिक छटा और धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था और आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां की पर्वतमालाओं के बीच स्थित 71 फीट ऊंचा झरना इन दिनों पूरे वेग से बह रहा है, जिससे क्षेत्र का सौंदर्य और भी निखर गया है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे घने जंगलों और लाल पत्थरों की चट्टानों के बीच बहता जलप्रपात एक अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत कर रहा है। झरने के नीचे स्थित मंदिर परिसर में भक्तजन बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, जहां जलधारा के किनारे पूजा, अर्चना और ध्यान किया जा रहा है। श्रद्धालु झरने के नीचे खड़े होकर प्रकृति की उस शक्ति को अनुभव कर रहे हैं, जो शांति और ऊर्जा दोनों का एहसास कराती है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

स्थानीय प्रशासन द्वारा यहां सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु झरने के निकट सुरक्षित रूप से दर्शन कर सकें। वहीं, सोशल मीडिया पर यहां की खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिससे दूर-दूर से लोग सुखानंद आने की योजना बना रहे हैं।

प्रकृति और संस्कृति का प्रतीक है सुखानंद तीर्थ 

सुखानंद तीर्थ आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि नीमच जिले की प्रकृति और संस्कृति का प्रतीक बन गया है — जहां आस्था, प्रकृति और शांति का त्रिवेणी संगम होता

[dgv_vimeo_video id=”1105109857″]

नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews