कोरोना वायरस की दहशत

कोरोना वायरस की दहशत

चीन में करीब 25 लोगों की जान लेने के बाद अब कोरोना वायरस की दहशत दुनिया भर में फैल गई है। इसके बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने चीन में इमरजेंसी की घोषणा कर दी है। अभी तक चीन में करीब 800 लोगों में इस जानलेवा वायरस के लक्षण दिखाई दिये हैं और हमारे लिये खतरे वाली बात ये है कि मुंबई में भी इस वायरस से संक्रमण के दो संदिग्ध मामले सामने आए हैं। दोनों ही मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है और उनकी पूरी तरह जांच की जा रही है। इसी के साथ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ऐहतियातन चीन से आने वाले यात्रियों की भी थर्मल स्केनर से जांच की जा रही है।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस एक वायरस फैमिली है जो चमगादड़, ऊंट, बिल्ली सहित कई और जानवरों में भी पाया जाता है। कुछ सी-फूड खाने से भी कोरोना वायरस फैलने की आशंका होती है। ये एक सोर्स वायरस है जो जानवरों के ज़रिये इंसानों तक पहुंच जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति को जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, बुखार आदि लक्षण पाए जाते हैं। इससे न्यूमोनिया हो जाता है और धीरे धीरे किडनी और फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। समय पर सही इलाज न मिलने पर इससे मरीज़ की मौत भी हो सकती है। फिलहाल इस वायरस के लिये कोई वैक्सीन नहीं बनी है लेकिन इस दिशा में काम शुरू किया जा चुका है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इससे बचाव के लिए खांसते या छींकते वक्त अपने मुंह को रूमाल से ढंके, सर्दी या बुखार के लक्षण वाले व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें, मांसाहारी भोजन को बहुत अच्छी तरह से पकाएं और अपने हाथों को साबुन या सेनेटाइज़र से अच्छी तरह साफ करें।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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