नौकरी नहीं मिलने से परेशान शिक्षकों ने दी सरकार को चेतावनी- जल्द किया जाए नियुक्त या दें इच्छा मृत्यु की आज्ञा

नौकरी नहीं मिलने से परेशान शिक्षकों ने दी सरकार को चेतावनी- जल्द किया जाए नियुक्त या दें इच्छा मृत्यु की आज्ञा

जबलपुर, संदीप कुमार

जिले में आज शिक्षक भर्ती 2018 चयनित अभ्यर्थी मध्यप्रदेश राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौपने कलेक्ट्रेट पहुंचे।जहां सभी अभियर्थियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। अभ्यार्थियों का कहना है काफी प्रयासों और ज्ञापन आंदोलन के बाद 1 से 3 जुलाई 2020 तक वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन उसके बाबजूद भी ज्वाइनिंग नही मिलने से है वह मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान हो गए है। ऐसे में या तो उन्हें जल्द नियुक्ति दी जाए या फिर इक्छा म्रत्यु की अनुमति प्रदान की जाए।

कलेक्टर कार्यालय पर SDM ने ज्ञापन लेकर उनकी मांगों को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। वही ज्ञापन में चयनित अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गयी तो प्रदेश में उनके 30,594 युवा बेरोजगारी से तंग आकर तथा सरकार की बेरुखी से सभी चयनित और वेटिंग प्राप्त अभियार्थी 28 अगस्त को मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में रिजल्ट की बरसी मनाएंगे।रिजल्ट प्रतियों का दहन और मुंडन भी कराएंगे।

वही 5 सितंबर को भोपाल पहुंचकर शिक्षक दिवस को काला दिवस के रूप में मनाते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। ज्ञापन देने वाले सभी लोगो ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि उन्हें इक्षा म्रत्यु प्राप्त न हो जाएं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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