हाथी ने दांतों से दबाकर रेंजर को मार डाला, सीएम ने जताया दुख

हाथी ने दांतों से दबाकर रेंजर को मार डाला, सीएम ने जताया दुख

पन्ना, डेस्क रिपोर्ट
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना (Panna) में एक हाथी ने रेंजर (Ranger) को कुचल कर मार डाला| मामला पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) का है| जहां रामबहादुर नाम के हाथी ने हिनौता रेंज के रेंजर बीआर भगत को दांतों तले दबाकर मार डाला। रेंजर की मौके ही मौत हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रेंजर के निधन पर दुख व्यक्त किया है|

यह घटना पन्ना टाईगर रिजर्व के हिनोता रेंज की है। हिनौता रेंज के रेंज ऑफिसर बीआर भगत को रामबहादुर हाथी ने मार डाला| टाइगर ट्रैकिंग के दौरान हाथी ने रेंजर भगत को दांतो से दबा दिया जिससे उनकी मौके पर मौत हो गई। इस इलाके में कुछ दिन पूर्व एक टाइगर की लाश मिली थी आपसी संघर्ष में मारे गए टाइगर से दूसरे टाइगर की इंजरी का पता लगाने के लिए रेंजर भगत लगातार ट्रैकिंग कर रहे थे और कोशिश कर रहे थे कि घायल दूसरा बाघ मिले तो उसका इलाज कराया जा सके| इस दौरान हाथी हाथी राम बहादुर नाराज हो गया। गुस्साए हाथी ने रेंजर को पकड़ा दांतों से दबाकर मार डाला। रेंजर भगत मूल रूप छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और 8 साल से वह एक ही रेंज में पदस्थ थे।

सीएम ने किया ट्वीट
सीएम ने लिखा टाइगर ट्रैकिंग के दौरान हिनौता रेंज की रेंज ऑफिसर बीआर भगत की हाथी के हमले से हुए निधन की दुःखद सूचना मिली। उन्होंने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने प्राण न्योछावर किये। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति देने की प्रार्थना करता हूँ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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