मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को पन्ना जिला जेल पहुंचकर केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन करने वाली दिव्या अहिरवार से मुलाकात की। लगभग 26 दिनों से जेल में बंद दिव्या से मिलने के बाद उन्होंने प्रदेश सरकार पर आदिवासियों की जमीन छीनने, मुआवजा नहीं देने और आंदोलनकारियों की आवाज दबाने के आरोप लगाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासियों के साथ कांग्रेस अंत तक खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि “सरकार याद रखें, आदिवासियों की आवाज़ को जेल की सलाखों में कैद नहीं किया जा सकता। पूरी कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ी है।”
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दिव्या अहिरवार से मिलने के बाद जीतू पटवारी ने कहा कि पन्ना और छतरपुर में आदिवासी परिवारों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 2015-16 के आसपास शुरू हुई थी। लगभग दस साल बाद भी प्रभावित परिवार मुआवजे और पुनर्वास के लिए परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के घर डूब क्षेत्र में आ गए हैं, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला। कांग्रेस नेता ने दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी को सरासर गलत बताते हुए कहा कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर जेल में रखा गया है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपने अधिकारों की मांग करने वाले लोगों के साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
पत्रकारों से बात करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि आदिवासियों के साथ अन्याय और दमन की सारी हदें पार हो चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे लोगों की आवाज दबाने के लिए पुलिस कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने पन्ना पुलिस अधीक्षक के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह तीसरी बार यहां आए हैं और पुलिस प्रशासन का व्यवहार अहंकारी है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी परिवार को उचित मुआवजे और पुनर्वास के बिना विस्थापित न होना पड़े। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की आवाज को जेल की सलाखों के पीछे कैद नहीं किया जा सकता और कांग्रेस उनके अधिकारों की लड़ाई में साथ खड़ी रहेगी।
कौन हैं दिव्या अहिरवार, क्यों हुई गिरफ्तारी
24 वर्षीय दिव्या अहिरवार छतरपुर जिले की बिजावर तहसील की रहने वाली हैं। वह जय किसान आंदोलन से जुड़ी हैं और केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित क्षेत्र की दूसरी विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के अधिकारों के लिए लंबे समय से आवाज उठाती रही हैं। वह आंदोलन में शामिल महिलाओं के बीच भी सक्रिय रही हैं।
इस साल सितंबर में पन्ना जिले के मझगवां बांध क्षेत्र में प्रभावित परिवारों का आंदोलन तेज हुआ। प्रदर्शनकारी मुआवजे में गड़बड़ियों, पुनर्वास और पात्र परिवारों को राहत नहीं मिलने के मुद्दे उठा रहे थे। इसी दौरान 28 सितंबर को दिव्या अहिरवार सहित कुछ आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किए जाने की खबरें सामने आई। उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों ने उनकी रिहाई की मांग उठाई। इस मामले में कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार प्रभावित परिवारों की मांगों पर सुनवाई करने की बजाय आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
केन-बेतवा परियोजना से जुड़ा विवाद
केन-बेतवा लिंक परियोजना केंद्र सरकार की नदी जोड़ो योजना का हिस्सा है। इसके तहत मध्यप्रदेश की केन नदी का पानी बेतवा नदी के बेसिन तक पहुंचाने की योजना है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य बुंदेलखंड में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। इस परियोजना के तहत छतरपुर जिले के दौधन क्षेत्र में बांध बनाया जा रहा है। इससे कुछ गांवों की जमीन, घर और आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। परियोजना से जुड़े विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे पर स्थानीय आदिवासी परिवार लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं।
प्रभावित लोगों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया में कई परिवारों के साथ अन्याय हुआ है। कुछ परिवारों के नाम मुआवजे की सूची में शामिल नहीं हैं, जबकि कुछ का आरोप है कि सूची में नाम होने के बावजूद उन्हें पूरी राशि नहीं मिली। लोगों की शिकायत है कि जमीन और मकान के नुकसान की भरपाई के साथ-साथ उनकी आजीविका और पुनर्वास की व्यवस्था भी होनी चाहिए। प्रशासन ने कुछ मामलों में दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू की थ लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि इससे उनकी समस्याओं का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है।
