चने में तेवड़े के कुछ दाने मिलने पर भी खरीदी से इंकार कर रहे सर्वेयर, किसान परेशान

चने में तेवड़े के कुछ दाने मिलने पर भी खरीदी से इंकार कर रहे सर्वेयर, किसान परेशान

रायसेन| दिनेश यादव| कोरोना काल में देर से शुरू हुई चने की खरीदी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है| एक और किसान अपनी मूंग की फसल का काम छोड़कर खरीदी केंद्रों पर चना तुलवाने आ रहें हैं| वहीं चने की फसल तेवड़ा मिलने पर अमान्य की जा रही है। शासन की शर्तें और सर्वेयर की मनमानी किसानों की मुसीबतें बढ़ा रही हैं। जिसके चलते किसानों को वापस लौटना पड़ रहा है|

प्रदेश में चना की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है| चना खरीदी केन्द्रों पर लाए जाने वाला चना को जब सर्वेयर के द्वारा चेक किया जाता है वह चने में तेवड़ा मिला होने की वजह से अधिकतर सैंपल फेल कर रहें है| शासन के इस फरमान से किसान मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं| एक और जहा कड़ी धूप में किसान अपनी उपज लेकर खरीदी केंद्र पर पहुंचते है। कई किसान तो किराए पर वाहन लेकर खरीदी केंद्र पहुंचते हैं । वहीं उपज को अमान्य बताते हुए उपज को रिजेक्ट कर दिया जाता है| किसानों का कहना है कि चने में कुछ दाने तेवड़ा के मिल रहे तो भी खरीदी नहीं की जा रही है|

बता दें कि चने की खरीदी के लिए नोडल एजेंसी नाफेड को बनाया गया है जो अपनी शर्तों के अनुसार चने की खरीदी करता है वर्तमान में किसान के द्वारा लाए जाने वाले चने में यदि तेबड़ा 10 दाने भी मिल रहे हैं तो नाफेड के सर्वेयर द्वारा सैंपल फेल किया जा रहा है| मूंग की फसल को छोड़कर किसान अपनी उपज बेचने खरीदी केंद्रों पर पहुँच रहा है, और उपज रिजेक्ट होने पर वापस लौटना पड़ रहा है| इससे किसानों को अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है| किसानों का कहना है कि एक और मुख्यमंत्री कहते हैं कि एक एक दाना खरीदा जायेगा, वहीं चने की खरीदी नहीं की जा रही है| बुधवार को ओबेदुल्लागंज में सर्वेयर द्वारा चना रिजेक्ट किये जाने से नाराज किसान ट्रालियां लेकर अतिरिक्त तहसील कार्यालय पहुंचे और अपनी पीड़ा व्यक्त की| जिस पर नायब तहसीलदार ने समस्या का कोई निराकरण करने का आश्वासन दिया तब किसान लौटे|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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