खेल-खेल में रतनजोत के बीज खा गए बच्चे, बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में इलाज जारी

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की सिलवानी तहसील में जहरीले रतनजोत के बीज खाने से करीब 17 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। गनीमत रही कि समय पर अस्पताल पहुंचाने से सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।
Raisen

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की सिलवानी तहसील के पुदर सलैया गांव में जहरीले रतनजोत के बीज खाने से करीब 17 बच्चों की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा खराब हो गई।

दरअसल इस घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के परिवार वालों और पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में बीमार बच्चों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।

स्कूल के पास लगे थे पौधे

बताया जा रहा है कि बच्चे स्कूल के आसपास खेल रहे थे तभी यह पूरा हादसा हुआ। स्कूल परिसर के पास ही रतनजोत के कुछ पौधे लगे हुए थे। खेलते-खेलते बच्चों ने अनजाने में इसके बीजों का सेवन कर लिया। बीज खाते ही कुछ ही देर में बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी और घबराहट की शिकायत होने लगी। बच्चों की हालत बिगड़ती देख तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन करके मौके पर बुलाया गया।

सिलवानी के सिविल अस्पताल में 15 बच्चे भर्ती

घटना के तुरंत बाद परिजनों और ग्रामीणों की मदद से सभी बच्चों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया गया। 108 एंबुलेंस और अन्य गाड़ियों की मदद से 15 बच्चों को तुरंत सिलवानी के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, दो बच्चों की तबीयत को देखते हुए उनका इलाज प्रतापगढ़ में ही कराया जा रहा है। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की विशेष टीम ने बिना किसी देरी के बच्चों का प्राथमिक इलाज शुरू कर दिया।

डॉक्टरों ने जताई राहत की बात

अस्पताल में भर्ती बच्चों का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने परिवार वालों को राहत भरी खबर दी है। सिलवानी सिविल अस्पताल में तैनात डॉ. राहुल धाकड़ ने मीडिया को बताया कि समय पर इलाज मिलने से फिलहाल सभी 17 बच्चों की हालत पूरी तरह से नियंत्रण में है। किसी भी बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों के स्वास्थ्य पर अपनी नजर बनाए हुए है।

स्थिति सामान्य होने तक डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे बच्चे

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी घटना पर लगातार अपनी नजर रखे हुए है, ताकि किसी बच्चे को परेशानी न हो। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को अभी कुछ समय के लिए अपनी देखरेख में ही रखा जाएगा। जरूरी दवाइयां देने के बाद जब बच्चों की सेहत पूरी तरह ठीक हो जाएगी, तब आगे का फैसला लिया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो ही किसी बच्चे को बड़े अस्पताल रेफर किया जाएगा।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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