जयपुर से आज का दिन नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी और पेपर लीक के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तीखे तेवरों के नाम रहा। दरअसल अशोक गहलोत ने नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मामले को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की जोरदार मांग की। कांग्रेस नेता गहलोत ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अब अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है। इसलिए, उन्हें या तो तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए, ताकि छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार की गंभीरता का स्पष्ट संदेश जाए।
दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री ने लगातार तीन वर्षों 2024, 2025 और 2026 में सामने आई पेपर लीक की घटनाओं को बेहद गंभीर स्थिति बताया। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि इन लगातार हो रही घटनाओं से देश के लाखों छात्रों का भविष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे युवाओं में गहरा आक्रोश पनप रहा है।
सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है और इस गंभीर स्थिति के लिए जिम्मेदारी तय करने में भी नाकाम रही है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी संसद में इस ज्वलंत मुद्दे को मजबूती से उठाया था और सरकार से इस पर सख्त कदम उठाने की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस सुधार या प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
कई छात्रों का भविष्य खराब हो गया : अशोक गहलोत
अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि पेपर लीक मामलों के कारण कई छात्रों का भविष्य खराब हो गया है, और कुछ मामलों में तो हताशा के चलते आत्महत्या तक की खबरें सामने आई हैं, जो निश्चित रूप से बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने केंद्र सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए आगाह किया कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई सख्त और निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो जनता का सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर से भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। उन्होंने अपनी मांग को दोहराते हुए एक बार फिर कहा कि छात्रों के भविष्य के प्रति सरकार की गंभीरता का संदेश देने के लिए या तो शिक्षा मंत्री स्वयं इस्तीफा दें या प्रधानमंत्री उन्हें पद से हटाएं।
गौरतलब है कि नीट-यूजी परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद इसे रद्द करना पड़ा था, जिसके बाद देशभर में छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसी इस गंभीर स्थिति के बाद सरकार ने अब इस परीक्षा को 21 जून को पुनः आयोजित कराने की घोषणा की है, लेकिन विपक्ष और छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।






