राजस्थान में 850 उपनिरीक्षकों की नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद से प्रदेश की सियासत में गर्माहट साफ देखी जा रही है, जहां कांग्रेस ने भजनलाल शर्मा सरकार को सीधे निशाने पर लिया है। इस निर्णय के चलते राजस्थान पुलिस के करीब 850 सब इंस्पेक्टर्स की नियुक्ति रद्द होने का मामला अब राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है, जिससे हजारों युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार को घेरते हुए कई तीखे सवाल उठाए हैं, जिसके जवाब की अपेक्षा की जा रही है।
दरअसल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि वह पिछले ढाई साल से क्या कर रही थी, जब भर्ती प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताएं सामने आ रही थीं। डोटासरा का कहना था कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी या अनियमितता पाई गई थी, तो सरकार को उस समय रहते ही ठोस कार्रवाई करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, यदि दोषियों पर समय रहते सख्त कदम उठाए जाते, तो आज इतनी बड़ी संख्या में चयनित सब इंस्पेक्टर्स को अपनी नौकरी से हाथ नहीं धोना पड़ता, और हजारों परिवारों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ता।
सरकार पर साधा निशाना
डोटासरा ने केवल सरकार की आलोचना ही नहीं की, बल्कि उन चयनित अभ्यर्थियों का भी मजबूती से पक्ष रखा, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और ईमानदारी के दम पर यह परीक्षा पास की थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी लोगों को एक ही नजर से देखना किसी भी तरह से उचित नहीं है, क्योंकि कई ऐसे युवा हैं जिन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की और पुलिस सेवा में आने का सपना देखा था। ऐसे मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थियों को दूसरों की गलती की कीमत चुकाना सरासर नाइंसाफी है।
सरकार से की ये अपील
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से ऐसे अभ्यर्थियों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता निकालने की अपील भी की। उनका तर्क था कि कई चयनित उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्होंने सब इंस्पेक्टर बनने के लिए अपनी पिछली अच्छी-खासी नौकरियां छोड़ दी थीं। अब इस नियुक्ति के रद्द होने से उनमें से कई अभ्यर्थी न केवल बेरोजगार हो गए हैं, बल्कि उनकी उम्र भी सरकारी नौकरी के लिए निर्धारित सीमा से अधिक हो चुकी है, जिसके चलते वे दूसरी सरकारी नौकरियों के लिए पात्र भी नहीं रहे हैं। यह स्थिति उनके लिए अत्यंत निराशाजनक और भविष्य को अंधकारमय बनाने वाली है।
डोटासरा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि भर्ती में गड़बड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ पहले ही प्रभावी कार्रवाई हो जाती, तो आज ईमानदार अभ्यर्थियों को इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। उनका स्पष्ट कहना था कि यह सब सरकार की घोर लापरवाही का परिणाम है, जिसका खामियाजा अब उन युवाओं को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने अपने उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों के साथ यह महत्वपूर्ण नौकरी जॉइन की थी। सरकार की इस देरी और अक्षमता ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है।
कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार हर मुद्दे को केवल राजनीतिक फायदे और नुकसान के नजरिए से ही देखती है, जिससे जनता के वास्तविक मुद्दों की अनदेखी होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार केवल जुमलेबाजी करती है और समय पर महत्वपूर्ण फैसले लेने में विफल रहती है। अब जब यह मामला एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुका है, तब सरकार कार्रवाई कर रही है, जिससे हजारों परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और उसकी मंशा पर सवाल उठाती है।






