Hindi News

राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: ED के बाद ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी को किया गिरफ्तार

Written by:Ankita Chourdia
Published:
राजस्थान में 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ा मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय के बाद अब एंटी-करप्शन ब्यूरो ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया।
राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: ED के बाद ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी को किया गिरफ्तार

राजस्थान में 900 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के मामले में जांच एजेंसियों की सक्रियता अब और तेज हो गई है, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बाद अब एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी जोशी के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) मंत्री के कार्यकाल के दौरान हुए टेंडर आवंटन में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी है। उन पर अपने पद का दुरुपयोग करने और टेंडर देने के बदले रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसके चलते इस बड़े घोटाले में उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे थे। इस कार्रवाई के साथ, मामले की तह तक पहुंचने की उम्मीदें बढ़ी हैं।

इससे पहले, अप्रैल 2025 में इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महेश जोशी को गिरफ्तार किया था, जो दर्शाता है कि विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियां इस मामले की गहनता से जांच कर रही हैं। एसीबी ने यह गिरफ्तारी 2024 के अंत में जल जीवन मिशन परियोजनाओं से जुड़े भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद पूर्व मंत्री के खिलाफ दर्ज की गई अपनी प्राथमिकी के आधार पर की है। जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के इस व्यापक मामले में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पूर्व मंत्री महेश जोशी के साथ-साथ 22 अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की थी, जिससे इस घोटाले की जड़ें काफी गहरी प्रतीत होती हैं।

इंजीनियर और अधिकारी भी जांच के घेरे में

आरोपियों की सूची में JJM के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन मुख्य अभियंता राम करण मीणा, दिनेश गोयल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, अधीक्षण अभियंता निरेल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में एसीबी को एक ईमेल आईडी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त हुआ था। इस सुराग के आधार पर, जांचकर्ताओं ने कई संदिग्ध खातों तक पहुंच बनाई, जिसके परिणामस्वरूप आखिरकार इसमें शामिल अधिकारियों के नाम सामने आए और घोटाले की परतें खुलती चली गईं।

फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर टेंडर आवंटन का आरोप

आरोपों के मुताबिक, इस परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया था, जहां टेंडर फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर दिए जा रहे थे, जिससे योग्य और ईमानदार बोलीदाताओं को दरकिनार किया गया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। सितंबर 2023 में, एसीबी ने जाली सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके टेंडर हासिल करने के आरोप में श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल नामक कंपनियों के खिलाफ पहली बार प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी एक मामला दर्ज किया और अपनी जांच के तहत व्यापक छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया।

केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति मिलने के उपरांत, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी 3 मई, 2024 को इस मामले में अपनी ओर से एक मामला दर्ज किया, जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया। ईडी ने अपनी जांच को तेजी से आगे बढ़ाते हुए 4 मई, 2024 को इसे पूरा कर लिया और अपने द्वारा जुटाए गए सभी महत्वपूर्ण सबूत तथा दस्तावेज एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दिए, जिससे एसीबी की जांच को बल मिला। अंततः, 30 अक्टूबर, 2024 को एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित कुल 22 लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज की, जिसके बाद अब यह गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।

Ankita Chourdia
लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews