राजस्थान की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को लेकर गहन चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक महत्वपूर्ण बयान ने प्रदेश की सियासत में गरमाहट ला दी है। गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद नई बहस छिड़ गई है। उन्होंने कहा है कि साल 2028 के विधानसभा चुनाव डोटासरा के ही नेतृत्व में लड़े जाएंगे। इस बयान को लेकर राजनीतिक पंडितों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस बयान को सीधे तौर पर सचिन पायलट से जोड़कर देखा जा रहा है। यह चर्चा जोरों पर है कि सचिन पायलट के समर्थक उन्हें पीसीसी चीफ के पद पर देखना चाहते हैं। ऐसे में अशोक गहलोत का यह बयान अचानक सामने आने से सियासी तापमान में वृद्धि हुई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी में गुटबाजी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। गहलोत के इस बयान के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। सियासत में नेताओं द्वारा दिए गए बयानों का अपना एक खास महत्व होता है और जब अशोक गहलोत जैसे अनुभवी नेता कोई बात कहते हैं, तो उसका असर और भी व्यापक हो जाता है।
जानिए अशोक गहलोत ने क्या कहा?
बता दें कि अशोक गहलोत ने यह बयान नए कांग्रेस मुख्यालय के भवन निर्माण संबंधी एक बैठक के दौरान दिया था। इस बैठक में कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। गहलोत ने गोविंद सिंह डोटासरा को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा, “डोटासरा जी, 2028 के चुनाव तो आपके नेतृत्व में ही होंगे।” उन्होंने आगे कहा कि “तब तक एक मंजिल या जितना निर्माण हो जाता है, ठीक है। चुनाव के बाद जब नया अध्यक्ष आएगा, तब वह आगे का निर्माण करा देगा।” गहलोत के इस बयान को सुनकर बैठक में मौजूद कई नेता मुस्कुराने लगे। यह घटनाक्रम कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में एक नए मोड़ का संकेत दे रहा है।
अशोक गहलोत के बयान ने मचाई हलचल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस में किसी भी तरह के बड़े फेरबदल की संभावना बेहद कम है। पार्टी आलाकमान फिलहाल राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन के मूड में बिल्कुल नहीं दिख रहा है। बीते दिनों दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष के कामकाज पर संतोष व्यक्त किया था। आलाकमान उनके प्रदर्शन से आश्वस्त नजर आया। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो अगले कुछ महीनों के भीतर प्रदेश में पंचायती राज और निकाय चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान संगठन में किसी भी तरह का बड़ा बदलाव करके कोई जोखिम मोल लेना नहीं चाहता है। पार्टी का मानना है कि ऐसे समय में संगठन में स्थिरता बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। गहलोत के इस बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में भविष्य की रणनीतियों पर अंदरूनी तौर पर मंथन जारी है।






