इंदौर के एमवाय अस्पताल सहित शहर के कई बड़े अस्पतालों में मंगलवार को मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कारण था डॉक्टरों का पेन डाउन आंदोलन, जो चार वरिष्ठ चिकित्सकों का वेतन रोके जाने के विरोध में किया गया। दरअसल मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) इंदौर के आह्वान पर एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं उससे संबद्ध अस्पतालों के चिकित्सकों ने एम.वाय. अस्पताल के मेन गेट पर एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया।
दरअसल डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व आदेश या सूचना के चार वरिष्ठ डॉक्टरों का वेतन रोक दिया गया है। एमटीए ने बताया कि संगठन के अध्यक्ष डॉ. राहुल रोकड़े के साथ डॉ. धर्मेंद्र झंवर, डॉ. अतुल शेंडे और डॉ. पाली रस्तोगी का मार्च और अप्रैल 2026 का वेतन अब तक जारी नहीं किया गया है। चिकित्सकों का दावा है कि उन्हें वेतन रोकने संबंधी कोई लिखित आदेश या कारण भी नहीं बताया गया, जो एक कर्मचारी के मौलिक अधिकारों का हनन है।
सीनियर डॉक्टरों ने बड़ी संख्या में भाग लिया
वहीं इस विरोध प्रदर्शन में एमजीएम मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, एमवाय अस्पताल, मानसिक चिकित्सालय, चाचा नेहरू अस्पताल, एमटीएच अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और एमआरटीबी अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। हड़ताल पर गए कई चिकित्सक जो समर वेकेशन पर थे, वे भी आंदोलन को अपना समर्थन देने और अपनी एकजुटता दिखाने के लिए पहुंचे। इस दौरान डॉक्टरों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की।
मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा
पेन डाउन आंदोलन का सीधा असर अस्पतालों की नियमित सेवाओं पर पड़ा। बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा। इसके साथ ही व्याख्यान और अन्य शिक्षण गतिविधियां भी बाधित रहीं, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ा। हालांकि, डॉक्टरों ने मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए आपातकालीन सेवाओं को पूर्ववत जारी रखा ताकि गंभीर मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
डीन के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था
एमटीए सचिव डॉ. अशोक ठाकुर ने बताया कि इस मामले को सुलझाने के लिए संगठन ने कई बार मेडिकल कॉलेज प्रशासन से संपर्क साधा था। 23 अप्रैल, 5 मई और 9 मई को प्रशासन से विस्तृत चर्चा की गई थी। इसके अतिरिक्त, 8 मई और 12 मई को डीन के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था, जिसमें बकाया वेतन जारी करने की मांग की गई थी। लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद वेतन का भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते चिकित्सकों को आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ा।
एमटीए अध्यक्ष डॉ. राहुल रोकड़े ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वेतन किसी भी कर्मचारी का मौलिक अधिकार होता है। बिना किसी ठोस आधार, आदेश या सूचना के वेतन रोकना पूरी तरह से अनुचित और गैरकानूनी है। उन्होंने इसे डॉक्टरों के अधिकारों का खुला हनन बताया। डॉ. अशोक ठाकुर ने भी इस मुद्दे की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल चार डॉक्टरों के वेतन का मामला नहीं है, बल्कि यह डॉक्टरों के सम्मान और उनके अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है।
एमटीए ने प्रशासन से मांग की है कि पिछले दो माह से इन चार डॉक्टरों का वेतन रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारियों की तत्काल पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चारों डॉक्टरों का बकाया वेतन जारी नहीं किया गया तो राज्य इकाई पीएमटीए के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में एक व्यापक और प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।






