
राजस्थान के करौली जिले से करीब 23 किलोमीटर दूर कैलादेवी कस्बे में वाल्मीकि परिवार अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए शहर आया और खून-पसीने की कमाई से आदर्श नगर जाटव बस्ती में भूखंड खरीदा। परिवार किराए के मकान में रहते हुए घर बनाने का काम शुरू कर रहा था। लेकिन अगस्त महीने में जाटव समाज के कुछ लोगों ने जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की सोच के चलते निर्माण कार्य रोक दिया। इस मामले में दबंगई के आरोप एक स्थानीय पुलिसकर्मी पर भी लगे हैं।
एफआईआर नहीं, ज्ञापन सौंपा गया
जितेंद्र वाल्मीकि का आरोप है कि थाने में पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और मामला रेवेन्यू का बताकर टाल दिया। इसके बाद 4 अगस्त को उपखंड अधिकारी और 11 अगस्त को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। NDTV की टीम जब मौके पर गई तो भूखंड का रास्ता पत्थर डालकर बंद मिला। वाल्मीकि परिवार फिलहाल मंडरायल रोड शिकारगंज में किराए के कमरे में तीन बच्चों के साथ रह रहा है।
राज्यपाल को भी दिया ज्ञापन
पीड़ित परिवार ने 4 अगस्त को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि पड़ोसी जाटव समाज के लोगों ने घर का प्रवेश द्वार जबरन बंद कर दिया और मजदूरों व मिस्त्रियों को धमकाकर भगा दिया। परिवार ने यह जमीन राजू जाटव से खरीदी थी और निर्माण कार्य शुरू किया था, लेकिन 2 अगस्त 2025 को कॉलोनीवासियों ने जातिगत द्वेष की वजह से मकान में घुसने का रास्ता रोक दिया।
आरोप-प्रत्यारोप और मानसिक तनाव
जितेंद्र वाल्मीकि का कहना है कि कॉलोनी निवासी परिवार को बदनाम कर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। महिलाओं और पुरुषों ने कहा कि “हमारे बीच नहीं रह सकते।” वाल्मीकि परिवार ने घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है। ज्ञापन में जताया गया कि जातिगत द्वेष के चलते उनका परिवार मानसिक तनाव झेल रहा है और बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। परिवार ने सात दिन में उचित कार्रवाई न होने पर धरने पर बैठने की चेतावनी भी दी है।
