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क्या सचमुच बदल गई बीजेपी की टीम, सोशल मीडिया पर आते ही क्यों छाई विवादित लिस्ट?

Written by:Deepak Kumar
Published:
क्या सचमुच बदल गई बीजेपी की टीम, सोशल मीडिया पर आते ही क्यों छाई विवादित लिस्ट?

राजस्थान बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी की एक कथित सूची सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है, जिसने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है। यह सात पेज की सूची सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले नाम शामिल थे। खास बात यह रही कि इसमें कुछ कांग्रेस से बीजेपी में आए नेताओं को भी जगह दी गई थी। साथ ही नए चेहरों को महामंत्री जैसे अहम पद दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया।

नेताओं में नाराजगी और विरोध

सूची के सामने आने के बाद कई पार्टी नेताओं ने विरोध जताया। कुछ नेताओं ने सूची में नाम न होने पर नाराजगी दिखाई, तो कुछ ने कमतर पद दिए जाने को लेकर असंतोष प्रकट किया। इस विवादित सूची को लेकर कई नेता प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मिलने पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज कराई। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह सूची अधिकृत नहीं है और पार्टी कार्यालय से जारी नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि कौन इस सूची को वायरल कर रहा है और इसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

पार्टी कार्यकर्ताओं में फैला असंतोष

सूची वायरल होते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया। इसका मुख्य कारण यह था कि इसमें राजस्थान सरकार के कुछ मंत्रियों की सिफारिशों का उल्लेख भी किया गया था। आमतौर पर कार्यकारिणी की सूची में केवल पदाधिकारियों के नाम और उनके पद होते हैं, लेकिन इस बार सिफारिशों का जिक्र भी किया गया। यह पहल कई कार्यकर्ताओं को नागवार लगी और उन्होंने कड़ा एतराज जताया। विवाद बढ़ने के बाद कुछ ही देर में यह सूची सोशल मीडिया से हटा दी गई।

वायरल सूची में दर्ज नाम और पद

वायरल सूची में कुल 34 पदाधिकारी दर्ज थे। इनमें 8 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री, 9 मंत्री, 1 कार्यालय मंत्री, 1 कार्यालय प्रभारी, 6 प्रवक्ता, 1 आईटी संयोजक, 1 आईटी सह संयोजक, 1 सोशल मीडिया संयोजक, 1 सोशल मीडिया सह संयोजक, 1 प्रकोष्ठ संयोजक और 1 मीडिया सह संयोजक शामिल थे। इस सूची में नामों और पदों की संख्या को लेकर भी कई सवाल उठे, क्योंकि इसमें कुछ नए और अप्रत्याशित चेहरों को महत्वपूर्ण पद दिए जाने की बात सामने आई।

इस पूरे विवाद ने पार्टी के आंतरिक समीकरणों को उजागर कर दिया है। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच असंतोष और नाराजगी ने स्पष्ट कर दिया कि संगठन के भीतर पद वितरण और सिफारिशों का मामला कितनी संवेदनशीलता से देखा जाता है। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की सफाई के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि आखिरकार इस विवादित सूची को वायरल करने के पीछे कौन और किस मकसद से है।

Deepak Kumar
लेखक के बारे में
तेज ब्रेकिंग के साथ सटीक विश्लेषण और असरदार लेखन में माहिर हैं। देश-दुनिया की हलचल पर नजर रखते हैं और उसे सरल व असरदार तरीके से लिखना पसंद करते हैं। तीन सालों से खबरों की दुनिया से जुड़े हैं। View all posts by Deepak Kumar
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