ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद राजस्थान के जयपुर में शिया समुदाय ने इस वर्ष ईद का त्योहार नहीं मनाने की घोषणा की है। समुदाय ने फैसला किया है कि रमजान के पूरे महीने शोक मनाया जाएगा और ईद के दिन भी काली पट्टी बांधकर या काले कपड़े पहनकर ही नमाज अदा की जाएगी।
जयपुर के इमाम-ए-जुमा नाजिश अकबर काजमी ने एक बयान जारी कर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिया मुसलमान गहरे शोक में हैं। यह निर्णय सिर्फ जयपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान के अन्य शहरों के शिया धर्मगुरुओं ने भी इस बार ईद की खुशियों से दूर रहने का फैसला किया है। समुदाय के अनुसार, इफ्तार में भी केवल सादा भोजन ही किया जाएगा।
‘यह दो-चार दिन की जंग नहीं, दुनिया में आग लगेगी’
इमाम नाजिश अकबर काजमी ने खामेनेई की मौत के वैश्विक परिणामों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया को जल्द ही पता चलेगा कि आयतुल्लाह खामेनेई के जाने से कितनी बड़ी मुश्किलें पैदा होंगी।
“यह दो-चार दिन की जंग नहीं है। यह अपने आखिरी पड़ाव तक चलेगी। अमेरिका-इजरायल और इनका साथ देने वाले जितने भी देश हैं, उनको भी पता लगेगा। पूरी दुनिया में आग लगेगी, अभी तो शुरुआत हुई है।” — नाजिश अकबर काजमी, इमाम-ए-जुमा, जयपुर
उन्होंने आगे कहा, “इस वक्त पेट्रोल की कीमतें भी आसमान छुएंगी और पूरी दुनिया को महंगाई से परेशान होना पड़ेगा। यह असर सिर्फ कुछ देशों पर नहीं, बल्कि उन सभी मजहबों पर होगा जिनके लिए खामेनेई आवाज उठाते थे।”
ईरान और इजरायल-अमेरिका पर बड़ा दावा
काजमी ने मौजूदा तनाव के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि ईरान हमेशा से बातचीत के लिए तैयार था और जंग नहीं चाहता था।
उन्होंने दावा किया, “नेतन्याहू ने जो अपराध कर रखे हैं, उन अपराधों की बिनाह पर उस पर मुकदमा चलेगा और उसे जेल में डाला जाएगा। वो जेल से बचना चाहता है इसलिए अमेरिका के साथ मिलकर उसने हमला किया है। वरना ईरान पहले ही कह चुका था कि वह न्यूक्लियर बम बनाना नहीं चाहता।”
इमाम ने कहा कि ईरान कोई सऊदी अरब, कतर या ओमान जैसा देश नहीं है, जिसे झुकाया जा सके। उन्होंने कहा, “ईरान दुनिया को बता देगा कि ताकत का मतलब क्या है।”
‘जान की बाजी लगाने से पीछे नहीं हटेंगे’
खामेनेई के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए काजमी ने कहा कि वे शिया समुदाय के सुप्रीम लीडर और रहबर थे। उन्होंने कहा, “उनके एक जुमले पर तमाम शिया अपनी जान का नजराना पेश करने के लिए अभी भी आमादा हैं। अगर जान की बाजी लगानी पड़ेगी तो हम इसमें पीछे नहीं हटेंगे। हम इस गम को जिंदगी भर नहीं भूलेंगे और ऐसा जवाब देंगे कि दुनिया याद रखेगी।”






