राजस्थान में आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले के 22 लाख पीड़ित परिवारों के साथ ‘डबल गेम’ करने का आरोप लगा है। दरअसल नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की भजनलाल शर्मा सरकार और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जो एक साथ दो अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दरअसल टीकाराम जूली ने कहा है कि डबल इंजन वाली यह सरकार एक ही वकील को डबल रोल में रखकर लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ अन्याय कर रही है।
दरअसल जूली ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया है कि सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार की ओर से आदर्श घोटाले की पैरवी कर रहे AAG शिवमंगल शर्मा और उनकी लॉ फर्म ‘ऑरा एंड कंपनी’ का इस घोटाले के आरोपियों के साथ संबंध सामने आया है। उन्होंने कहा है कि इसी घोटाले से जुड़े एक सह-आरोपी सिद्धार्थ चौहान के दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे मुकदमे में ‘ऑरा एंड कंपनी’ ही बचाव पक्ष की वकील है। सिद्धार्थ चौहान इस मामले में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। जूली के अनुसार यह ‘हितों के टकराव’ का सीधा मामला है, जो न्यायिक मर्यादाओं और बार काउंसिल के नियमों का उल्लंघन करता है।
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लगभग 15,000 करोड़ रुपये की ठगी की थी
बता दें कि आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाला वर्ष 1999 में मुकेश मोदी और उनके परिवार द्वारा शुरू किया गया था। इस सोसाइटी ने 2010 से 2014 के बीच करीब 22 लाख लोगों से लगभग 15,000 करोड़ रुपये की ठगी की थी। जांच में सामने आया था कि लगभग 125 फर्जी कंपनियों के माध्यम से जनता का पैसा मोदी परिवार के सदस्यों और उनके करीबियों तक पहुंचाया गया था। इस मामले में 2018 में एसओजी ने एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद कुछ गिरफ्तारियां भी हुई थीं। पीड़ितों को न्याय की उम्मीद थी, लेकिन अब इस मामले को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं।
जानिए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने क्या कहा?
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बताया है कि आदर्श घोटाले में कई आरोपी शामिल हैं, जिनमें से एक आरोपी सिद्धार्थ चौहान भी है। उन्होंने कहा है कि राजस्थान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस केस की पैरवी अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इसी घोटाले से जुड़े दो अन्य मुकदमे गुड़गांव और दिल्ली में चल रहे हैं। इन मुकदमों में सिद्धार्थ चौहान सह-आरोपी है और फरार होने के कारण भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपी सिद्धार्थ चौहान के दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे मुकदमे में आरोपी की ओर से ‘ऑरा एंड कंपनी’ लॉ फर्म नियुक्त है, जो वकील शिवमंगल शर्मा, सौरभ राजपाल, निधि जायसवाल और उनके साथियों की फर्म है।
टीकाराम जूली ने सवाल उठाते हुए कहा है कि यह कैसे संभव है कि एक तरफ वही वकील दिल्ली में घोटाले के आरोपी का बचाव कर रहे हैं और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार की ओर से पीड़ितों का पक्ष रखने का दावा कर रहे हैं। उनके अनुसार यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है और पैसा गंवा चुके निवेशकों के साथ अन्याय है।
जूली ने कानूनी पहलुओं का जिक्र करते हुए कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया का नियम 33 किसी भी वकील को विरोधी हितों वाले पक्षों के लिए काम करने से रोकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘चंद्र प्रकाश त्यागी बनाम बनारसी दास’ मामले में यह व्यवस्था दी है कि वकील और क्लाइंट का संबंध विश्वास पर आधारित होता है। जब वकील के पास दोनों पक्षों की गोपनीय जानकारियां होती हैं, तो न्याय की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि एक ही घोटाले से जुड़े मामलों में एक वकील दिल्ली हाई कोर्ट में सह-आरोपी की पैरवी कर रहा हो और वहीं सुप्रीम कोर्ट में उसी मामले में राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में उपस्थित हो, तो यह स्थिति स्पष्ट रूप से हितों के टकराव की श्रेणी में आती है। उनके अनुसार यह निष्पक्ष न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और पीड़ितों के साथ अन्याय है।
उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग
टीकाराम जूली ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या अधिवक्ता शिवमंगल शर्मा और ‘ऑरा लॉ फर्म’ ने राजस्थान सरकार को यह जानकारी दी थी कि वे इसी घोटाले के सह-आरोपी के वकील के रूप में भी काम कर रहे हैं। यदि सरकार को इस बात की जानकारी थी, तो ऐसे हितों के टकराव वाले वकील को राज्य का पक्ष रखने के लिए नियुक्त करना पीड़ितों के साथ गलत है।