हरियाणा कांग्रेस की डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (DAC) ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों को पार्टी से निलंबित करने की सिफारिश की है। दरअसल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ईमेल के जरिए प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को सौंप दी है, जिसमें इन विधायकों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के बाद हरियाणा कांग्रेस में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है, क्योंकि अब हाईकमान इन विधायकों के भविष्य पर अंतिम फैसला लेगा।
वहीं रिपोर्ट मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह इसे सीधे पार्टी हाईकमान को भेजेंगे। हाईकमान ही अब इन विधायकों पर अंतिम फैसला करेगा। अगर पार्टी इन विधायकों को सस्पेंड करती है, तो वे विधानसभा सदस्य बने रहेंगे, लेकिन सदन के अंदर पार्टी के व्हिप को मानने के लिए बाध्य होंगे। इसका मतलब है कि अगर कांग्रेस किसी विधेयक या प्रस्ताव पर व्हिप जारी करती है, तो इन निलंबित विधायकों को उसका पालन करना होगा, नहीं तो उनके खिलाफ आगे कार्रवाई हो सकती है।
DAC की बैठक में चर्चा हुई थी
दरअसल शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई DAC की बैठक में इस बात पर गहराई से चर्चा हुई थी कि पांचों विधायकों को ऐसी सजा दी जाए जिससे उन्हें भविष्य में सदन के अंदर मनमानी करने की कोई छूट न मिले। कमेटी का मकसद यह था कि ये विधायक न पूरी तरह पार्टी में रह पाएं और न ही पूरी तरह बाहर निकल पाएं, जिससे अंत में वे खुद ही पार्टी छोड़ने पर मजबूर हो जाएं। यह रणनीति विधायकों को सबक सिखाने और पार्टी के अंदर अनुशासन बनाए रखने के लिए अपनाई जा रही है।
DAC की बैठक लगभग सवा घंटे तक चली, जिसमें कई अहम घटनाक्रम हुए। सुबह 10 बजे नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी और साढौरा से विधायक रेनू बाला ने अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक को व्हाट्सएप पर एक टाइप किया हुआ पत्र भेजा। इसमें उन्होंने कोई भी फैसला लेने से पहले व्यक्तिगत पेशी (पर्सनल हियरिंग) का मौका मांगा था, जिसे कमेटी ने तुरंत स्वीकार कर लिया। शाम 4 बजे कमेटी की बैठक शुरू होने का समय तय था। इससे पहले ही दोनों विधायक शैली चौधरी और रेनू बाला चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुंच गईं। रेनू बाला ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और सीधे अंदर चली गईं, जबकि शैली चौधरी ने कहा कि उन्हें बुलाया गया था, इसलिए वे यहां आई हैं।
अपना पक्ष रखने के लिए 10-10 मिनट का समय मिला
दोनों विधायकों को कमेटी के सामने अपना पक्ष रखने के लिए 10-10 मिनट का समय मिला। पहले रेनू बाला ने अपनी बात रखी और दोहराया कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को ही वोट दिया है। उनके बाद शैली चौधरी ने भी यही बात कही। सूत्रों के अनुसार, एक विधायक ने दावा किया कि उन्होंने अपना वोट कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दिखाया था, जबकि दूसरी विधायक ने कहा कि उन्होंने पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद को वोट दिखाया था।
दोनों विधायकों का पक्ष सुनने के बाद कमेटी के सदस्यों ने करीब एक घंटे तक आपस में चर्चा की है। इस दौरान कमेटी ने बाकी तीन विधायकों, पुन्हाना के मोहम्मद इलियास और हथीन के मोहम्मद इजराइल के लिखित जवाबों को भी पढ़ा है। सूत्रों के अनुसार, कमेटी इस बात पर एकमत रही है कि विधायकों को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए, लेकिन इस दौरान तकनीकी पेचीदगियों पर भी गहराई से विचार किया गया है। चूंकि पुन्हाना विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन विधायक मोहम्मद इजराइल ने शोकॉज नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया था, इसलिए कमेटी ने पहली नजर में यह मान लिया है कि उन्होंने क्रॉस वोटिंग की है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, क्रॉस वोटिंग के आरोपी विधायकों को लेकर दो मुख्य विकल्पों पर चर्चा हुई है उन्हें निलंबित किया जाए या पार्टी से बाहर निकाला जाए। दोनों ही स्थितियों में विधायकों की विधानसभा सदस्यता पर तुरंत कोई खतरा नहीं होगा। निलंबन की स्थिति में, जैसा कि पहले बताया गया है, पार्टी का व्हिप मान्य होगा। इसका अर्थ यह है कि अगर कांग्रेस सदन में किसी भी मामले में व्हिप जारी करती है, तो इन विधायकों को उसका पालन करना अनिवार्य होगा। अगर वे व्हिप का उल्लंघन करते हैं, तो उन पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।






