बाड़मेर विधायक रविंद्र सिंह भाटी का अल्पसंख्यक वोटर्स को लेकर बड़ा बयान, कहा – ‘वोट नहीं दिया, मगर…’

बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के अल्पसंख्यक वोट को लेकर दिए बयान के बाद नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि कई गांवों से उन्हें वोट मिले थे, इसलिए बयान तथ्यात्मक रूप से गलत और अपमानजनक है। मामले के तूल पकड़ने पर भाटी ने कहा कि शिव का हर व्यक्ति उनके परिवार जैसा है, हालांकि अल्पसंख्यक समाज से अपेक्षित समर्थन न मिलने का दुख भी जताया।
बाड़मेर विधायक रविंद्र सिंह भाटी का अल्पसंख्यक वोटर्स को लेकर बड़ा बयान, कहा - 'वोट नहीं दिया, मगर...'

राजस्थान की राजनीति में बाड़मेर के शिव क्षेत्र से एक नया विवाद उभर आया है। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की एक टिप्पणी, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें अल्पसंख्यकों ने वोट नहीं दिया, अब चुनावी गणित और सामाजिक प्रतिनिधित्व—दोनों सवालों के केंद्र में आ गई है। बयान के सामने आते ही खासकर मुस्लिम समाज की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई और इसे सार्वजनिक मंच से किया गया अनुचित सामान्यीकरण बताया गया।

स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि शिव विधानसभा के कई गांवों ने 2023 चुनाव में भाटी का समर्थन किया था। समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि अगर अल्पसंख्यक मतदाताओं का समर्थन नहीं मिलता, तो इतने कड़े मुकाबले में उनकी जीत संभव नहीं थी। नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि विधायक का बयान उनके योगदान को नकारने जैसा लगा।

बयान और प्रतिक्रिया: विवाद कैसे बढ़ा

शिव सीट पर 2023 का चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में देखा गया था और रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में उनके बयान को विपक्ष और समुदाय के नेताओं ने तुरंत राजनीतिक मुद्दा बना दिया। आरोप यह भी लगा कि सदन में मुस्लिम समाज की भावनाओं का सम्मान नहीं किया गया।

“मुझे अल्पसंख्यकों ने वोट नहीं दिया लेकिन फिर भी उनकी बात करता हूं।” — रविंद्र सिंह भाटी

विवाद बढ़ने के बाद भाटी ने ABP से बातचीत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि शिव विधानसभा का हर व्यक्ति उनके परिवार का सदस्य है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समाज से वोट न मिलने का उन्हें दुख है। उनके इस स्पष्टीकरण के बाद भी स्थानीय स्तर पर असहमति पूरी तरह शांत नहीं हुई है।

2023 के नतीजे और वोटों का गणित

आंकड़ों के स्तर पर यह बहस इसलिए भी तेज है क्योंकि भाटी ने 2023 विधानसभा चुनाव 3950 वोटों के अंतर से जीता था। शिव सीट पर मुस्लिम मतदाता संख्या को प्रभावी माना जाता है। इसी आधार पर समुदाय की ओर से कहा गया कि चुनाव में उनकी हिस्सेदारी को शून्य बताना वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता।

स्थानीय राजनीतिक चर्चा में यह दावा भी सामने आया कि जिन गांवों में मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात 90 प्रतिशत से ऊपर है, वहां से भाटी को करीब 3500 वोट मिले थे। यही बिंदु अब विवाद का केंद्रीय तर्क बन गया है—अगर इतनी संख्या में वोट मिले, तो ‘वोट नहीं दिया’ जैसा वाक्य क्यों और किस संदर्भ में कहा गया।

कांग्रेस का हमला और आगे की सियासत

कांग्रेस नेता फतेह खान ने भी इस मुद्दे पर भाटी को घेरा है। उनका आरोप है कि विधायक ने सदन में मुस्लिम समाज का उपहास किया और यह बयान राजनीतिक संदेश देने के लिए दिया गया। फतेह खान ने यह भी कहा कि भाटी RSS और BJP की विचारधारा के करीब रहे हैं और ऐसे बयान BJP में एंट्री की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों पर भाटी की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन उनका यह कहना दर्ज है कि वे पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। फिलहाल मुद्दा केवल एक बयान तक सीमित नहीं है; यह प्रतिनिधित्व, चुनावी समर्थन और समुदायों के साथ संवाद की राजनीति से भी जुड़ गया है।

शिव विधानसभा में आगे की राजनीति के लिए यह विवाद अहम माना जा रहा है। जीत का अंतर सीमित रहा था, इसलिए हर सामाजिक समूह के साथ संबंध और भरोसा बनाए रखना किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए निर्णायक रहता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि भाटी के स्पष्टीकरण से असंतोष कम होता है या यह बहस स्थानीय चुनावी विमर्श में और गहराती है।

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Rishabh Namdev

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