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RGHS में फर्जीवाड़ा, बिना जरुरत कराये टेस्ट, फर्जी तरीके से लिए क्लेम, सात चिकित्सक निलंबित, अस्पताल व डायग्नोस्टिक सेंटर पर एफआईआर

Written by:Atul Saxena
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कुछ चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में वे अवकाश पर थे अथवा उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं।
RGHS में फर्जीवाड़ा, बिना जरुरत कराये टेस्ट, फर्जी तरीके से लिए क्लेम, सात चिकित्सक निलंबित, अस्पताल व डायग्नोस्टिक सेंटर पर एफआईआर

RGHS

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर चिकित्सा विभाग राजस्थान सरकार गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) पर पैनी नजर जमाये हुए है और अनियमितता ल्कारने वालों पर कड़ा एक्शन ले रहा है, इसी क्रम में चिकित्सा विभाग ने 7 और चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है साथ ही, एक अस्पताल एवं एक डायग्नोस्टिक सेंटर के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस योजना के सुचारू संचालन की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। योजना में ऑडिट के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर सीकर जिले में पदस्थ 7 चिकित्सकों को निलंबित किया गया है। इनमें मेडिकल कॉलेज सीकर में कार्यरत अस्थि रोग विभाग के सह आचार्य डॉ. कमल कुमार अग्रवाल एवं डॉ. सुनील कुमार ढाका एवं जनरल मेडिसिन विभाग के सह आचार्य डॉ. मुकेश वर्मा, सीएचसी किरवा के डॉ. राकेश कुमार, एसके अस्पताल के डॉ. गजराज सिंह, डॉ. एसएस राठौड़ तथा डॉ. सुनील शर्मा शामिल हैं।

इसी प्रकार योजना में अनियमितता कर अनुचित लाभ लेने पर भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम तथा बीकानेर के बोथरा डायग्नोस्टिक एण्ड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है।

लाभार्थियों के कार्ड का दुरूपयोग कर लिए फर्जी क्लेम

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह तथ्य गंभीर रूप से उजागर हुआ है कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी एवं भरतपुर नर्सिंग होम द्वारा मिलीभगत कर आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को भारी हानि पहुँचाई है। जांच में सामने आया कि अस्पताल की डॉक्टर संगीता अग्रवाल द्वारा आरजीएचएस में पूर्व में अनुमोदित ना होते हुए भी आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को आरजीएचएस से सुविधा देने का प्रलोभन दिया। उन्होंने अपने अस्पताल में आरजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज किया एवं टीआईडी जनरेट करने के लिए उनके एसएसओ आईडी पासवर्ड लिए तथा उपचार उपरान्त अपने ही अस्पताल की कशिश फार्मेसी से जांचें एवं दवाइयों को फर्जी तरीके से आरजीएचएस पोर्टल पर एडजेस्ट कर भुगतान प्राप्त किया। दोनों संस्थानों ने मिलीभगत कर लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर क्लेम स्वीकृत करवाने की कोशिश की, जिससे प्रत्यक्ष रूप से राजकोष को हानि पहुँची है। अस्पताल को आरजीएचएस योजना से पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।

बिना जरूरत के की गई जांचें

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर, बीकानेर द्वारा प्रस्तुत क्लेमों की जांच में सामने आया कि कई मामलों में मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं तथा परीक्षण रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि कुछ मरीजों के लिए HbA1c, RA Factor, Procalcitonin जैसे परीक्षण दर्शाए गए, जबकि रिकॉर्ड में आवश्यक चिकित्सीय औचित्य स्पष्ट नहीं था। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में T2DM के लिए दर्शाए गए HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई तथा ओपीडी स्लिप पर भी संबंधित परामर्श का उल्लेख नहीं मिला।

चिकित्सकों के नाम एवं सील फर्जी

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पीबीएम राजकीय चिकित्सालय, बीकानेर के वरिष्ठ चिकित्सकों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित चिकित्सकों के बयानों में यह तथ्य सामने आया कि जिन पर्चियों पर उनके नाम एवं सील दर्शाए गए हैं, उनमें से कई पर हस्ताक्षर एवं लेखन उनके द्वारा किया जाना स्वीकार नहीं किया गया। कुछ चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में वे अवकाश पर थे अथवा उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ पर्चियों पर दर्शाए गए चिकित्सक उस समय पीबीएम अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे या उनका पंजीयन बाद की तिथि का था।

पूर्व में भी की गई सख्त कार्रवाई

योजना में अनियमितताएं करने वाले अस्पतालों, फार्मेसी एवं लाभार्थियों पर पूर्व में भी सख्त कार्रवाई की गई है। योजना में गड़बड़ी पर अस्पताल एवं फार्मेसी के विरूद्ध 19 एफआईआर दर्ज करवाई है। अनियमितता पर 7 चिकित्सकों सहित 64 कार्मिकों को निलंबित किया गया है एवं करीब 500 कार्ड ब्लॉक किए गए हैं और कार्ड के दुरूपयोग पर लाभार्थियों से करीब 2 करोड़ की राशि वसूल की गई है। इसी प्रकार 33 अस्पतालों का टीएमएस एवं 39 अस्पतालों का भुगतान ब्लॉक किया गया है। साथ ही, 8 अस्पताल डी-एम्पेनल किए गए हैं। इन अस्पतालों से 32 करोड़ से अधिक की राशि वसूल की गई है। इसी प्रकार 212 फार्मेसी का टीएमएस ब्लॉक किया गया और इनसे 5 करोड़ से अधिक की राशि वसूल की गई।

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