सरकारी स्कूल विवाद: बच्चों के तिलक और मूर्ति पूजा पर रोक, प्रिंसिपल ने किया सफाई

सरकारी स्कूल विवाद: बच्चों के तिलक और मूर्ति पूजा पर रोक, प्रिंसिपल ने किया सफाई

सिरोही जिले के रेवदर ब्लॉक के पेरवा स्थित सरकारी स्कूल में मंगलवार (16 सितंबर) को छात्रों के तिलक और मूर्ति पूजा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने प्रिंसिपल पेपसिंह मीणा पर आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय लोग और विद्यार्थी नेताओं का कहना है कि प्रिंसिपल ने छात्रों को महादेव और माताजी की पूजा करने से रोका और धार्मिक रीति-रिवाजों को व्यर्थ बताया। विरोध बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल को स्कूल से हटा दिया और जांच पूरी होने तक सीबीईओ कार्यालय में रिपोर्टिंग के निर्देश दिए।

छात्र और ग्रामीणों के आरोप

विश्व हिंदू परिषद के नेता रणछोड़ पुरोहित सहित कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने बच्चों को तिलक लगाने और देवपूजन से रोकने के साथ ही रामायण-महाभारत को नकारात्मक रूप से पढ़ाने का प्रयास किया। छात्रों का कहना है कि पिछले दो महीने से उन्हें धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसके अलावा, जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में छात्राओं की हार के बाद अभद्र व्यवहार और पर्याप्त स्टाफ की अनुपस्थिति का भी आरोप प्रिंसिपल पर लगाया गया, जिससे स्कूल की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।

शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई

विरोध की जानकारी मिलने के बाद एसीबीईओ एवं कार्यवाहक सीबीईओ घनश्याम सिंह आढा, गमनाराम कोली सहित अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों व ग्रामीणों से शिकायतें सुनीं। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी मृदुला व्यास को रिपोर्ट भेजी गई। आदेश मिलने पर प्रिंसिपल पेपसिंह मीणा को तत्काल प्रभाव से स्कूल से हटाकर सीबीईओ कार्यालय में रिपोर्टिंग करने का निर्देश जारी किया गया। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग ने विवाद पर कड़ा रुख अपनाया और जल्द निष्पक्ष जांच कराने का संकेत दिया।

प्रिंसिपल की सफाई और चेतावनी

प्रिंसिपल पेपसिंह मीणा ने आरोपों को राजनीति प्रेरित बताया और कहा कि उन्होंने कभी बच्चों को तिलक या पूजा से रोका नहीं। उन्होंने कबीर का पाठ समझाते समय कुछ बातें गलत प्रचारित होने की बात कही। छात्रा टीम मामले में महिला शिक्षिका की समय पर अनुपस्थिति को लेकर गलतफहमी फैली। वहीं, ग्रामीणों और संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि प्रिंसिपल के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो स्कूल का गेट बंद कर आंदोलन किया जाएगा। यह मामला दो साल पहले आबूरोड स्कूल में तिलक और राखी को लेकर उठे विवादों की याद दिलाता है और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

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