सब्जी बाजार में उमड़ी 2 हजार की भीड़, प्रशासन बेपरवाह

सब्जी बाजार में उमड़ी 2 हजार की भीड़, प्रशासन बेपरवाह

राजगढ़/मनीष सोनी

अब हम जो खबर आपको बता रहे हैं और जो तस्वीर आप देख रहे हैं, ये दरअसल हमारी जहालत की तस्वीर है। ये एक ऐसे समूह ही समाज की तस्वीर है जिसे न तो आने वाले खतरे का भय है न सरकारी निर्देशों का चिंता। ये राजगढ़ का सब्जी बाजार है, जहां बुधवार को 2 हजार से ज्यादा लोग एक साथ सब्जी खरीदने आ गए।

ये लॉकडाउन फेलियर की ऐसी तस्वीरें हैं जो हम सबके लिये बहुत बड़ी चिंता की बात है। जिले में लॉक डाउन है और धारा 144 भी लागू है। यह भारी भीड़ राजगढ़ के दशहरा मैदान की है, जहां सब्जी बाजार में बुधवार दोपहर दो हजार से अधिक लोगों की भीड़ सब्जी लेने उमड़ पड़ी। सब्जी बाजार से लेकर सड़कों तक लोगों का जमावड़ा लगा रहा और दूसरी तरफ राजगढ़ प्रशासन गहरी नींद में सोया रहा। खास बात यह है कि यहां पुलिस बल भी मौजूद है लेकिन किसी ने भीड़ को रोकने की कोशिश तक नहीं की। ज़रा सोचिये कि अगर इस भीड़ में एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज हुआ तो आगे क्या होगा। फिलहाल तो ये तस्वीरें वहां के लोगों की नादानी और जिला प्रशासन की विफलता की कहानी कह रही हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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