माहे रमज़ाम की शुरूआत पर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने छत पर अता की नमाज़, सबकी सलामती की दुआ मांगी

माहे रमज़ाम की शुरूआत पर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने छत पर अता की नमाज़, सबकी सलामती की दुआ मांगी

राजगढ़

मध्यप्रदेश के राजगढ़ में मुस्लिम समाज द्वारा माहे रमजान प्रारंभ होने से पूर्व देश में बढ़ रहे कोरोना वायरस के खात्मे के लिए अपनी अपनी घरों की छत पर सामूहिक रूप से दुआ की गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने अपनी-अपनी छतों पर नमाज अता करते हुए देश से कोरोना जैसी महामारी को खत्म करने के लिए दुआ की।

राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर की तमाम मस्जिदों से कोरोना महामारी से बचाव के लिए दुआ की गई । पवित्र रमजान माह के प्रारंभ के पूर्व ब्यावरा नगर की मस्जिदों में माइक से सामूहिक दुआ की गई, मुस्लिम समाज के लोगो ने अपने अपने घर की छतों से दुआ में शिरकत की। इस दौरान भी लॉकडाउन के नियमो का पालन और सोशल डिस्टेंसिंग का भी अनुसरण किया गया।

कोरोना की विश्वव्यापी महामारी से निजात दिलाने के लिये जब नगर की मस्जिदों के इमामों ने हाथ उठा कर परवरदिगार से दुआ मांगी तो नगर के हजारों मुस्लिम धर्मावलंबियों ने हाथ उठा कर आमीन कहा और अल्लाह से दुआ कर कोरोना महामारी के खात्मे की दुआ की। कोरोना महामारी के दौरान अपनी सेवाएं दे रहे पुलिस, प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारियों और स्वास्थ्य कर्मियों डॉक्टर नर्सेस और सफाईकर्मियों व वह सभी संगठन जो अपनी जान की परवाह किए बिना इस महामारी से बचाव में लगे हुए है उन सभी की सेहत के लिये भी दुआ, देश मे अमन चैन भाईचारे और खुशहाली के लिए भी दुआ की गई ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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