यहां पुलिसकर्मियों पर हुई फूलों की वर्षा, आरती उतारी..तालियों से किया स्वागत

यहां पुलिसकर्मियों पर हुई फूलों की वर्षा, आरती उतारी..तालियों से किया स्वागत

राजगढ़ | मनीष सोनी| देश मे रोजाना कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच एक बार फिर ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने बता दिया कि लोगों का विश्वास पुलिस, प्रशासन बना हुआ हैं| सोमवार को जिले के ख़िलचीपुर नगर में जब पुलिस लोगों को लॉकडाउन का पालन करने का संदेश देने नगर बाजार से गुजर रही थी तो बालकनी में खड़े लोग ताली बजाकर उनका स्वागत कर रहे थे और उनके ऊपर फूलों की बारिश कर रहे थे| इस दौरान बाजार से गुजर रहे कर्मवीर पुलिस कर्मियों की आरती भी की गई|

ख़िलचीपुर में लाकडाउन के दौरान बाजार से गुजर रहे ख़िलचीपुर sdop निशा रेड्डी, थाना प्रभारी वीरेंद्र धाकड़ , sdm प्रकाश कस्बे सहित पुलिस बल पर नगर के लोगो ने बालकनी में खड़े होकर ऊपर से फूलों की वर्षा कर ताली बजाकर स्वागत किया| साथ ही कुछ नगर की बालिकाओं ने उनकी आरती उतारी ।

ख़िलचीपुर में लाकडाउन का सख्ती से पालन किया जा रहा है| कोरोना वायरस पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए राजस्थान सीमा से लगे मध्यप्रदेश के ख़िलचीपुर तहसील क्षेत्र को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। कोई भी व्‍यक्ति घरों से बाहर नहीं जा सकता। इस क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स लगाई गई है। 24 घंटे जनता की सेवा में लगे हुए पुलिस कर्मियों का क्षेत्र के लोगों ने छतों से फूल वर्षा कर तालियों से स्वागत किया| लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर रहकर जनता के लिए 24 घंटे सेवा में लगे हुए हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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