सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां, क्षमता से अधिक मजदूरों को भरकर बस झारखंड रवाना

सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां, क्षमता से अधिक मजदूरों को भरकर बस झारखंड रवाना

राजगढ़| मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के राजगढ़ (Rajgarh) में एलएनटी कंपनी में काम कर रहे झारखंड राज्य के 183 मजदूर फंसे हुए थे, इन मजदूरों को आज जिला प्रशासन की अनुमति के बाद कंपनी ने तीन बसों के माध्यम से उनके राज्य झारखंड भेजा। तीन बसों में क्षमता से अधिक मजदूरों को बिठाया गया। एक सीट पर 4 मजदूर बैठ कर गए| वही सीट ना होने पर कुछ मजदूरों को खड़े होकर भी जाना पड़ा। भले ही पूरे देश में ग्रीन जोन में चलने वाली बसों में सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बस की क्षमता से आधी सवारियों को बिठाया जाए लेकिन आज बस में 50 परसेंट सवारी बिठाने का आदेश केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गया और खुलकर सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) की धज्जियां उड़ाई गई।

राजगढ़ के जीरापुर के पास स्थित एलएनटी कंपनी में झारखंड के 183 मजदूर कार्य कर रहे थे लाक डाउन होने से यह मजदूर यहां फंसे हुए थे, लंबे समय से मजदूर घर जाने की मांग कर रहे थे । एलएनटी कंपनी ने इन मजदूरों को भेजने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति ली और तीन बसों के माध्यम से इन्हें भेजा गया। मजदूरों को भेजने में आज सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया। एक सीट पर चार मजदूरों को बिठाया गया, वही सीट पर जगह ना होने से कुछ मजदूर बस में खड़े खड़े भी गए । बस के पाइप पर भी मजदूर बैठे हुए नजर आ रहे हैं । बस में सोशल डिस्ट्रेसिंग का पालन कहीं भी नजर नहीं आ रहा , इन मजदूरों को जब भेजा गया तब प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे लेकिन वह भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर सके। ग्रीन जोन के लिए सरकार ने बसों के आवाजाही के लिए नियम बनाए है उन नियमों का भी मखौल उड़ाया गया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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