जब लड़की वाले बोले, लड़के की शक्ल अच्छी नहीं, सड़क पर चल गए लट्ठ , पढ़ें पूरी खबर

जब लड़की वाले बोले, लड़के की शक्ल अच्छी नहीं, सड़क पर चल गए लट्ठ , पढ़ें पूरी खबर

राजगढ़, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक प्रथा के चलते दो पक्ष आपस में भिड़ गए और उनके बीच लट्ठ चल गए। झगड़ा सड़कों तक पहुँच गया जिसकी चर्चा और वीडियो गांव से निकल कर शहर तक वायरल हो गई। मामला शादी से जुड़ा है।

दरअसल राजगढ़ जिले (Rajgarh News)  के कोतवाली थाना क्षेत्र में रहने वाले बबलू तंवर नमक युवक का रिश्ता 5 साल पहले रघुनाथपुरा गांव की लड़की से उस समय तय हुआ था जब वो 15 साल का था।  अब जब वो 20 साल का हो गया तो परिजनों ने लड़की वालों से शादी की चर्चा शुरू की। जब शादी की बात शुरू हुई तो लड़की वालों ने ये कहकर इंकार कर दिया कि लड़की की शक्ल अच्छी नहीं है।

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जब लड़की वालों ने शादी से इंकार किया तो बबलू के परिवार वालों ने नातरा झगड़ा प्रथा (jhagada pratha) के तहत एक तय रकम की मांग की तो विवाद शुरू हो गया। लड़की वालों ने पैसे देने से इंकार कर दिया तो लड़के वाले कोतवाली थाने शिकायत करने जाने लगे। इसी दौरान दोनों पक्षों ने बस स्टैंड पर शराब की और फिर शराब के नशे में धुत होकर लड़की पक्ष के लोगों ने लड़के पक्ष के लोगों को जमकर पीटा। इसमें बबलू तंवर सहित 5 लोग घायल हो गए।

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क्या होती है झगड़ा प्रथा 

झगड़ा प्रथा आदिवासी समाज की एक प्रचलित प्रथा है। माता पिता जब बचपन में बच्चों की शादी तय कर देते हैं और जब वे समझदार होते हैं तो उनकी शादी कर दी जाती है। लेकिन कई बार लड़का अथवा लड़की एक दूसरे को पसंद नहीं करते और शादी से इंकार कर देते हैं।  अधिकांश मामलों में लड़का लड़की को छोड़ देता है या लड़की अपने बचपन के पति को छोड़कर अपने पसंद के युवक से शादी आकृति है अथवा मायके आ जाती है ऐसे में लड़के वाले लड़की की परिवार अथवा नए पति से झगड़ा ( निश्चित रकम) वसूलते हैं।

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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