कोरोना इफेक्ट: काम-धंधे बंद हुए तो छोटे व्यापारी बेचने लगे सब्जी

कोरोना इफेक्ट: काम-धंधे बंद हुए तो छोटे व्यापारी बेचने लगे सब्जी

रतलाम।सुशील खरे।

रतलाम छोटा-मोटा काम कर घर चलाने वालों के लिए लॉकडाउन से परेशानी हो गई है। फुटकर काम करने वाले लोगों ने अपना व्यापार बदल लिया है।छोटे-मोटे व्यापार कर प्रतिदिन घर चलाने वाले के लिए रोजगार की समस्या खड़ी हो गई हैं। इनमें से कुछ युवाओं ने अपना व्यवसाय बदल लिया है। मनियारी, डीजे, पंक्चर जैसे छोटे-छोटे व्यापार कर अपनी जीविका चलाने वाले कुछ लोगों ने अपना व्यापार बदल लिया है।

दरअसल, लॉकडाउन में दी जाने वाली छूट में ये व्यापारी सब्जी, फल-फ्रूट की दुकान खोल ली है। दर्शन बैरागी सालों से मनियारी सामान बेचकर परिवार पालते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते दुकान बंद होने से आजकल सब्जी की दुकान लगाकर घर खर्च चल रहे हैं। ऐसे ही रेडियो, डीजे सुधारक सुरेश माली ने बताया अभी डीजे व रिपेयरिंग का काम बंद है। घर चलाने के रोज पैसे की जरूरत होती है इसलिए अभी छूट में चार घंटे सब्जी बेचने से घर खर्च निकल जाता है। इसमें कोई बुराई नहीं है। नायन के रहने वाले रवि यादव वैसे तो छूट कर ठेकेदारी के काम करते हैं, लेकिन अभी सब काम बंद है। अभी लॉकडाउन में मिलने वाली छूट में प्याज का ठेला लगाकर घर खर्च चला रहे हैं। लॉकडाउन में घर चलाने के लिए बदल लिया अपना व्यवसाय।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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