रतलाम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल कुवैत से आए 66 वर्षीय मोटर पार्ट्स कारोबारी को फर्जी ATS और पुलिस अधिकारी बनकर तीन दिन तक डराया गया। वहीं आतंकियों को फंडिंग और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से संबंध होने का झूठा आरोप लगाकर उनसे 55 लाख रुपए RTGS के जरिए ट्रांसफर करा लिए गए। बाद में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 15 लाख रुपए फ्रीज करा दिए।
दरअसल रतलाम के माणकचौक इलाके में रहने वाले 66 वर्षीय कारोबारी के साथ हुई इस ठगी ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया है। ठगों ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस और ATS अधिकारी बताकर कारोबारी को इतना डरा दिया कि उन्होंने तीन दिन तक घर से बाहर निकलना और परिवार से बात करना भी बंद कर दिया। पुलिस ने अब इस मामले में ई-एफआईआर दर्ज कर साइबर ठगों की तलाश शुरू कर दी है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार व्यवसायी पिछले पांच-छह महीने से रतलाम में रह रहे थे जबकि उनका मोटर पार्ट्स का कारोबार कुवैत में है। शुरुआती बातचीत के बाद ठगों ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और दूसरी निजी जानकारी हासिल की और फिर फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके खिलाफ गंभीर जांच चल रही है। इसी डर का फायदा उठाकर उन्होंने दो दिनों में 55 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।
ऐसे की गई 55 लाख की ठगी
दरअसल 15 सितंबर को कारोबारी के मोबाइल पर एक कॉल आया जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र के कोलाबा का पुलिस इंस्पेक्टर बताया। पहले उनके मोबाइल नंबर और कारोबार से जुड़ी सामान्य जानकारी पूछी गई ताकि बातचीत भरोसेमंद लगे। इसके बाद ठगों ने दावा किया कि उनके नाम पर जारी एक दूसरे मोबाइल नंबर से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में रहकर आतंकियों को फंडिंग की गई है। इसके बाद लगातार अलग-अलग नंबरों से कॉल और व्हाट्सएप वीडियो कॉल आने लगे। वीडियो कॉल में कुछ लोग पुलिस की वर्दी में दिखाई दिए और खुद को ATS अधिकारी बताते रहे। ठगों ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज भी भेजे और कहा कि कारोबारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
इतना ही नहीं उन्हें हथियारों की तस्वीरें भेजकर पहचान करने को कहा गया ताकि माहौल और ज्यादा वास्तविक लगे। ठगों ने सख्त हिदायत दी कि इस पूरे मामले की जानकारी किसी को नहीं देनी है। कारोबारी तीन दिन तक घर के अंदर ही रहे और यहां तक कि घर पर काम करने आने वाले लोगों को भी मना कर दिया। डर इतना बढ़ गया कि उन्होंने 17 सितंबर को ICICI बैंक से 35 लाख और 18 सितंबर को पंजाब नेशनल बैंक से 20 लाख रुपए RTGS के जरिए अलग-अलग खातों में भेज दिए।
पुलिस ने 15 लाख फ्रीज कराए
जानकारी के अनुसार कारोबारी की पत्नी उस समय रतलाम में नहीं थीं। तीन दिन तक कॉल का जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने परिजनों को घर भेजा। जब दामाद और एक मित्र घर पहुंचे तो कारोबारी बेहद घबराए हुए मिले और वे ठगों के कहने पर 20 लाख रुपए और ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहे थे। परिजनों ने उन्हें तुरंत साइबर सेल पहुंचाया जहां पुलिस ने NCRP पोर्टल के जरिए तत्काल कार्रवाई करते हुए 15 लाख रुपए फ्रीज कराए। पुलिस अधिकारियों ने उनकी काउंसलिंग की और समझाया कि कोई भी पुलिस, CBI, ED, NCB, TRAI, ATS या सुप्रीम कोर्ट फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकता। इसके बाद अतिरिक्त 20 लाख रुपए ट्रांसफर होने से भी रोक दिए गए।






