करणी सेना का धरना 30 घंटे बाद हुआ खत्म, फोरलेन से हटे प्रदर्शनकारी, प्रशासन ने दिया आश्वासन

रतलाम में करणी सेना का 30 घंटे लंबा धरना आखिरकार खत्म हो गया है। दरअसल महू-नीमच फोरलेन पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद रास्ता खाली किया है।
करणी सेना का धरना 30 घंटे बाद हुआ खत्म, फोरलेन से हटे प्रदर्शनकारी, प्रशासन ने दिया आश्वासन

रतलाम में करणी सेना का धरना करीब 30 घंटे बाद समाप्त हो गया है। दरअसल प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से बातचीत और आश्वासन मिलने के बाद फोरलेन से हटने का फैसला लिया जिससे यातायात फिर से सामान्य हो सका। बता दें कि करणी सेना परिवार के नेतृत्व में यह प्रदर्शन मंगलवार से शुरू हुआ था जिसमें बड़ी संख्या में लोग महू-नीमच फोरलेन पर डटे रहे थे। रात भर टेंट लगाकर और सड़क पर ही रुककर उन्होंने अपना विरोध जारी रखा था।

वहीं संगठन के प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर ने कहा है कि उनका मकसद सिर्फ अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाना था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और किसी तरह का उपद्रव नहीं किया गया है।

क्या थीं 11 सूत्रीय मांगें?

दरअसल इस प्रदर्शन का मुख्य कारण 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन से बात करना था। बता दें कि इनमें अवैध उत्खनन के नाम पर हो रही कार्रवाई पर रोक, लापता नाबालिग की तलाश, चोरी की घटनाओं पर सख्ती और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल थे। वहीं जीवनसिंह शेरपुर ने कहा कि दो महीने से गायब 14 साल की बच्ची की तलाश उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। उन्होंने दावा किया कि धरना शुरू होते ही प्रशासन ने इस मामले में तेजी दिखाई और बच्ची को तलाश लिया गया। इस पर उन्होंने सवाल भी उठाया कि क्या हर मामले में इसी तरह धरना देना पड़ेगा।

कलेक्टर से मुलाकात को लेकर सामने आया सबसे बड़ा विवाद

इसके अलावा किसानों की समस्याएं, गेहूं खरीदी में आ रही दिक्कतें और स्थानीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की मांग भी रखी गई थी। दरअसल प्रशासन ने इन सभी मुद्दों पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि सभी मांगों की जांच की जाएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे। वहीं धरने के दौरान सबसे बड़ा विवाद कलेक्टर से मुलाकात को लेकर सामने आया। प्रदर्शनकारी लगातार कलेक्टर से सीधे बात करने की मांग कर रहे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। वहीं इस पर जीवनसिंह शेरपुर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कलेक्टर ज्यादा व्यस्त थीं और उनकी बात सुनने नहीं आईं।

दरअसल उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उन्हें मिलने से रोका और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया। वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया कि प्रदर्शनकारियों को उनकी मांगों पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी गई थी, लेकिन वे संतुष्ट नहीं थे।

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मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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