सुशील खरे/रतलाम। पुरानी रंजिश के चलते पिता के कहने से बेटे ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी ।इस हत्या में उसने अपने दो साथियों को भी साथ मिलाया। मामला रतलाम का है। एक साल पहले शोएब उर्फ छोटा उकड़ी का विवाद अब्दुल से हो गया था। उस वक्त दोनों में चाकू बाजी हुई जिसमें दोनों पक्ष के लोग घायल हुए थे ।छोटा उकङी के खिलाफ जिला बदर का प्रतिवेदन कलेक्टर के सामने पेश किया गया था जिसकी अंतिम सुनवाई 25 फरवरी को होनी थी ।इसी बीच छोटा उकङी के पिता अब्दुल हक ने उससे कहा कि वह अब्दुल उर्गुफड्डू को मार दे ।छोटा उकङी ने अपने दो अन्य साथियों रवि और पिता अब्दुल कादिर के साथ अब्दुल को p&t कॉलोनी में बुलवाया और गली में आते ही उस पर चाकू से हमला कर दिया। घटना के बाद एसपी गौरव तिवारी ने टीम बनाकर हत्या के आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस टीमें गठित की थी जिन्होंने आरोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है। छोटा उकड़ी के खिलाफ पहले से ही तेरह मामले पंजीबद्ध है। हत्या सुनियोजित ढंग से की गई इसीलिए एसपी गौरव तिवारी का कहना है कि इस मामले में धारा 120b बढ़ाई जाएगी।
पिता के कहने पर बेटे ने की हत्या, आरोपी गिरफ्तार
Written by:Gaurav Sharma
Published:
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






