Thu, Jan 1, 2026

2026 में कब-कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण? भारत में दिखेगा ? सूतककाल मान्य होगा ? देखें डेट-टाइम डिटेल्स

Written by:Pooja Khodani
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Surya /Chandra Grahan 2026: साल 2026 में दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। इस दौरान दुर्लभ फुल ब्लड मून का भी नजारा देखने को मिलेगा। यह ग्रहग फरवरी, मार्च और अगस्त महीने में लगेंगे। आइए जानते हैं विस्तार से...
2026 में कब-कब लगेंगे सूर्य और  चंद्र ग्रहण? भारत में दिखेगा ? सूतककाल मान्य होगा ? देखें डेट-टाइम डिटेल्स

ज्योतिष शास्त्र में ग्रह नक्षत्रों की तरह ग्रहण का बड़ा महत्व माना जाता है। साल 2025 की तरह 2026 भी खगोलीय घटनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण होने वाला है। इस साल कुल 4 ग्रहण लगेंगे, जिनमें 2 सूर्यग्रहण और 2 चंद्रग्रहण है। ​हालांकि केवल एक ग्रहण (3 मार्च का चंद्रग्रहण) ही भारत में दिखाई देगा। बता दें कि 2025 में साल का पहला सूर्यग्रहण 29 मार्च और दूसरा 21 सितंबर को लगा था, लेकिन भारत में दिखाई नहीं दिया। पहला चन्द्र ग्रहण 14 मार्च और दूसरा 7 सितंबर को लगा था। इसमें से दूसरा चन्द्र ग्रहण भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, अमेरिका और अफ्रीका में देखा गया था।

नेशनल अवार्ड प्राप्‍त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य और पृथ्‍वी के बीच चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य का प्रकाश पृथ्‍वी के किसी भाग तक नहीं पहुंच पाता है और उस भूभाग से सूर्य कुछ समय के लिए नहीं दिखता है, इसे सूर्यग्रहण कहते हैं । इसी प्रकार चन्द्रग्रहण के दौरान जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्‍वी आ जाती है तो सूर्य का प्रकाश पूरी तरह से चंद्रमा पर नहीं पहुंच पाता, जिससे चंद्रमा की चमक धीमी हो जाती है।

2026 में फरवरी, मार्च और अगस्त में लगेंगे ग्रहण

सारिका घारू ने बताया कि आमतौर पर हर साल दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण होते ही हैं। 2026 में 17 फरवरी और 12 अगस्‍त को सूर्यग्रहण की घटना होगी। 17 फरवरी को वलयाकार सूर्यग्रहण व 12 अगस्‍त को पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। यह दोनों भारत में नहीं दिखाई देंगे। वहीं, पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को होली पर लगेगा, जिसे भारत में शाम को चंद्रोदय के बाद कुछ मिनट के लिए देखा जा सकेगा। वैसे तो यह पूर्ण चंद्रग्रहण है, लेकिन मध्‍यप्रदेश में यह आंशिक चंद्रग्रहण के रूप में ही अलग-अलग शहरों में लगभग 15 से 45 मिनट तक दिखाई देगा। दूसरा चंद्रग्रहण रक्षाबंधन 28 अगस्‍त को होगा। यह अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में दिखेगा लेकिन भारत में नहीं। यह आंशिक चंद्रग्रहण होगा।

2026 में कब-कब लगेंगे ग्रहण?

सूर्यग्रहण: पहला 17 फरवरी 2026 (वलयाकार सूर्यग्रहण) को यह भारत को छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी भाग, साउथ अमेरिका के दक्षिणी भाग, अंटार्कटिका आदि में आंशिक ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। दूसरा 12 अगस्‍त 2026 (पूर्ण सूर्यग्रहण) को भारत को छोड़कर अफ्रीका, यूरोप, आर्कटिक, उत्‍तरी एशिया और उत्‍तरी अमेरिका मे दिखेगा. भारत में यह नजर नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

चन्द्रग्रहण: पहला 3 मार्च 2026 (पूर्ण चंद्रग्रहण) भारत में आंशिक चंद्रग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा। यह ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा को भारतीय समयानुसार शाम 6 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर 6 बजकर 46 मिनट पर खत्म होगा।इसकी अवधि करीब 20 मिनट की होगी। यह ग्रहण भारत के साथ साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में भी दिखाई देगा। चूंकि भारत ( जैसे मप्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर भारत) में यह ग्रहण दिखेगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य होगा। सूतक सुबह 9 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा । चंद्रग्रहण लगने के 9 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है। दूसरा 28 अगस्‍त 2026 (आंशिक चंद्रग्रहण ) को भारत को छोड़कर नार्थ-साउथ अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में दिखेगा । भारत में यह नजर नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

ग्रहण की अवधि में क्या करें और क्या नहीं?

  • ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
  • ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
  • ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
  • खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
  • ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
    बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
  • ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
    सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।

(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)