सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। साल भर में आने वाली सभी एकादशियों में पापमोचनी एकादशी को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश हो जाता है।
लेकिन इस पवित्र दिन कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं जिन्हें करने से व्रत का फल कम हो सकता है। इसलिए पापमोचनी एकादशी के दिन नियम और संयम का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। अगर इस दिन कुछ गलतियां हो जाएं तो इसका धार्मिक लाभ कम हो सकता है।
पापमोचनी एकादशी 2026 की तिथि और शुभ समय
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि विशेष संयोग लेकर आ रही है।
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का प्रारंभ 14 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 11 मिनट पर होगा। यह तिथि 15 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च 2026, रविवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विशेष महत्व बताया गया है।
पापमोचनी एकादशी पर इन कार्यों से बचना चाहिए
क्रोध और विवाद से दूर रहें
एकादशी के दिन मन को शांत रखना बहुत आवश्यक माना जाता है। इस दिन किसी से झगड़ा करना, बहस करना या अपशब्द बोलना उचित नहीं माना जाता।
क्रोध करने से मन अशांत होता है और पूजा में मन नहीं लग पाता। इसलिए इस दिन संयम और शांति बनाए रखना जरूरी है।
झूठ और बुरे विचारों से दूरी रखें
पापमोचनी एकादशी का दिन पवित्रता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन झूठ बोलना, किसी के बारे में बुरा सोचना या गलत कार्य करना अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्यक्ति को अपने विचारों और व्यवहार को शुद्ध रखना चाहिए।
देर तक सोने से बचें
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। देर तक सोना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और पूजा करना इस व्रत की परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
पापमोचनी एकादशी के दिन क्या करना चाहिए
पापमोचनी एकादशी के दिन कुछ धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन भगवान के भजन, मंत्र जाप और ध्यान में समय बिताना शुभ माना जाता है। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को दान देना और उनकी मदद करना भी इस दिन पुण्यदायी माना जाता है।
पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पापमोचनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। यही कारण है कि इस एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस व्रत को करता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पिछले जन्मों और वर्तमान जीवन के पापों से भी मुक्ति मिल सकती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होने की मान्यता है।
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