चार दिवसीय चैती छठ महापर्व का काफी महत्व माना गया है। रविवार को नहाय खाय के साथ इसकी शुरुआत हो गई है। इस पर्व के दौरान व्रत रखा जाता है नहाय खाय के दिन व्रतियों ने गंगा स्नान कर चना दाल, अरवा चावल और कद्दू की सब्जी ग्रहण की। सोमवार यानी आज खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा।
शास्त्रों में निर्धारित नियमों के अनुसार चैत्र शुक्ल पंचमी को कृतिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में व्रत करने वाले लोग दिन भर निराहार रहकर खाना पूजा कर प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग में सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। चलिए खरना और अर्घ्य का समय जान लेते हैं।
खरना पूजा और अर्घ्य का समय
शाम 6:01 से 7:29 तक खरना पूजा का शुभ समय है। अस्ताचलगामी सूरज को शाम 6:02 मिनट तक अर्घ्य दिया जा सकता है। इसके बाद उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने का समय सुबह 5:57 के बाद का है।
सामग्री और उनका महत्व
खरना और नहाय खाय की पूजा में कुछ सामग्रियों का विशेष महत्व माना गया है। इनमें ठेकुआ, ऋतु फल, ईख और सूप मुख्य है। उनके धार्मिक महत्व की बात करें तो ठेकुआ को समृद्धि के संकेत के रूप में देखा जाता है। सूप अर्घ्य देने में बांस से बनी इस सामग्री का उपयोग किया जाता है। ऋतुफल लाभ और सुख-समृद्धि के संकेत के रूप में पहचाने जाते हैं। ईख यानि गन्ना आरोग्यता से जोड़कर देखा जाता है।






