चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। इस दिन देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजन का विधान है। ऐसा कहते हैं कि जो व्यक्ति देवी की पूजन करता है उसका कल्याण होता है और जीवन के सारे दुख दर्द दूर हो जाते हैं। 21 मार्च यानी आज देवी के इसी स्वरूप को पूजा जाने वाला है।
माता चंद्रघंटा का रूप बहुत ही अलौकिक है। अगर आप उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं तो खास विधि से पूजा कर सकते हैं और कुछ खास चीजों का भोग भी लगा सकते हैं। चल जान लेते हैं कि उन्हें कौन सा रंग पसंद है और नैवेद्य के रूप में क्या रखना चाहिए।
माता की पूजा का मुहूर्त
देवी चंद्रघंटा की पूजा की मुहूर्त की बात करें तो सुबह 4:49 से 5:37 तक का समय शुभ है, यह ब्रह्म मुहूर्त का टाइम है। इसके बाद दोपहर 12:04 से 12:53 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। 2:30 से 3:18 तक विजय मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है। 6:32 से 6:55 तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा। अमृत काल का समय 5:58 से 7:27 तक है। निशिता मुहूर्त रात 12:04 से शुरू होगा और 22 मार्च की रात 12:52 तक रहेगा। रवि योग रात 12:37 से 22 मार्च के सुबह 6: 23 तक रहने वाला है।
कैसा है माता का स्वरूप
माता चंद्रघंटा के स्वरूप की बात करें तो उनका शरीर स्वर्ण की भांति एकदम चमकीला है। उनकी 10 भुजाएं हैं, जो अस्त्र शस्त्र से सुशोभित है। वह शेर की सवारी करती हैं। विधि विधान से माता की पूजा करने से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक रोग और कष्ट दूर होते हैं।
किन चीजों का लगाएं भोग
अगर आप माता को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें दूध से बनी हुई खीर और मिठाई का भोग लगा सकते हैं। इस भोग से माता अत्यंत प्रसन्न होंगी और आपको निरोगी काया देंगी। माता की पूजा के समय उन्हें लाल रंग का गुलाब और कमल जरूर अर्पित करें क्योंकि यह रंग उन्हें बहुत प्रिय है।
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