कब मनाई जाएगी देवउठनी एकादशी? यहां जानें सही तिथि, मुहूर्त और व्रत के नियम

देवउठनी एकादशी पर श्री हरि विष्णु अपनी 4 महीने की योगनिद्रा से जाग जाते हैं। इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। चलिए इस साल की सही तारीख और मुहूर्त के बारे में जान लेते हैं।
Dev uthani Ekadashi

देवउठनी एकादशी (Dev Uthani ekadashi) एक ऐसा दिन है जिसका बेसब्री से इंतजार किया जाता है। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष में आने वाला यह दिन इसलिए खास है क्योंकि इस दिन श्री हरि विष्णु अपनी निद्रा से जाग जाते हैं। इस समय वैसे भी भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजन करने का विशेष महत्व माना गया है। इस समय की गई पूजन पाठ हमें सुख समृद्धि देने का काम करती है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देव उठानी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जाग जाते है। इस दिन जो व्यक्ति विधि पूर्वक पूजन पाठ करता है उसे अपने सारे पाप से मुक्ति मिल जाती है। इससे जीवन में सुख शांति आती है और घर में हमेशा समृद्धि बनी रहती है। चलिए जान लेते हैं कि देवउठनी एकादशी कब है और शुभ मुहूर्त क्या है।

कब है देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi)

देवउठनी एकादशी इस बार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की 1 तारीख को मनाई जाने वाली है। यह सुबह 9:11 पर शुरू होगी और 2 नवंबर को सुबह 7:13 पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में से 1 नवंबर को मनाया जाएगा क्योंकि इस दिन चातुर्मास भी खत्म हो रहा है।

कब करें व्रत का पारण

वैसे तो हर एकादशी की व्रत का विशेष महत्व बताया गया है लेकिन देवउठनी एकादशी का व्रत बहुत खास होता है। इस बार एकादशी का पारण 2 नवंबर को किया जाएगा। इसका समय 1:11 से शाम 3: 23 तक रहने वाला है। इतने समय में आप कभी भी पूर्ण कर सकते हैं।

इन नियमों का रखें ध्यान

  • देवउठनी एकादशी के समय आपको पूरी तरह से सात्विक भोजन करना चाहिए। इस समय तामसिक भोजन और चावल का सेवन अच्छा नहीं माना गया है।
  • इस दिन काले रंग के कपड़े से आप जितना दूर रहेंगे उतना अच्छा होगा। दरअसल पूजन पाठ के हिसाब से काला रंग शुभ नहीं माना जाता इसलिए इसे पहनने से परहेज करें।
  • अपने घर और मंदिर के साफ सफाई का विशेष तौर पर ध्यान रखें। दरअसल माता लक्ष्मी का वास वहीं पर रहता है जहां पर साफ सफाई रहती है। अगर उनकी कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो हमेशा अपने घर को साफ रखें।
  • इतना याद रखें की एकादशी का व्रत करने के बाद इसका पारण हमेशा द्वादशी पर किया जाता है।
  • व्रत का पारण करने के बाद आपको अन्न और धन का दान करना चाहिए। यह दान आप मंदिर में या फिर किसी जरूरतमंद को कर सकते हैं। इस दिन किए गए दान से सुख समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।

Diksha Bhanupriy
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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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