शनि की साढ़ेसाती में ना करें ये काम, मिल सकते हैं बुरे परिणाम

Shani Dev Angry Reasons

Shani Sade Sati Effects : शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। इसके अलावा, वह कर्मफल का दाता भी कहे जाते हैं। जिनकी उपासना से व्यक्ति न्याय धर्म और उचित कार्यों के महत्व को समझता है। शनि देव की कृपा से व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करता है। जिनकी कार्य अच्छे होते हैं, उन्हें शुभ परिणाम मिलता है और जिनके कम बुरे होते हैं। उन्हें भगवान दंड देते हैं। जिस कारण उन्हें जीवन में बहुत सी परेशानियां झेलनी पड़ती है। इसी कड़ी में साल 2024 में कुछ राशियों पर शनि देव की साढ़ेसाती रहेगी जबकि कुछ राशि पर ढैया का असर रहेगा। आइए जानते हैं विस्तार से इसके उपाय…

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बुरे प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय

  • साधकों को शनिवार के दिन भगवान शनि देव की विधि विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए।
  • इस दिन गरीबों को जूते चप्पल कपड़े आदि का दान करें जिससे भगवान शनि अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
  • हर शनिवार को जरूरतमंदों को कपड़ा और भोजन कारण जिससे शनि देव की विशेष कृपा बरसेगी।
  • ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, हर शनिवार को काले कुत्ते और काली गाय को रोटी खिलाने की मान्यता है इससे जीवन में खुशहाली आती है
  • यदि आप शनि देव के प्रभावों से बचना चाहते हैं तो आप नीलम रत्न को भी धारण कर सकते हैं।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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