दशहरा पर इस विधि से करें भगवान राम की पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, भोग और नीलकंठ का महत्व

दशहरा का पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। चलिए आपको इस दिन के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, भगवान राम के किए भोग और नीलकंठ के महत्व के बारे में बताते हैं।
Dussehra 2025

हर साल अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा (Dussehra 2025 ) का पर्व मनाया जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने इस दिन रावण का अंत किया था। माता दुर्गा ने भी 10 दिनों के युद्ध के बाद महिषासुर पर विजय हासिल की थी। आज 2 अक्टूबर के दिन दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। हर तरफ उल्लास और उमंग का माहौल देखने को मिल रहा है।

दशहरे के दिन रावण दहन किया जाता है और इससे पहले पूजन पाठ करने की भी परंपरा है। आज हम आपको दशहरा से जुड़े कुछ प्रमुख बातें बताते हैं। पूजन का मुहूर्त क्या है किस विधि से पूजन करनी है। भगवान राम का प्रिय भोग कौन सा है। इसी के साथ आज के दिन से नीलकंठ का क्या कनेक्शन है यह भी जान लेते हैं।

रावण दहन का मुहूर्त

रावण दहन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो 2:09 से 2:56 तक शस्त्र पूजन का शुभ समय। रावण दहन प्रदोष काल में किया जाएगा। सूर्यास्त का समय 6 बजकर 6 मिनट रहेगा।

जान लें पूजन विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लाल या पीले रंग के कपड़े धारण करें।
  • पूजा स्थल पर गंगा जल छिड़क कर शुद्ध करें।
  • अब आपको एक वेदी पर भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करनी होगी।
  • अब उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, फूल और मौसमी फल अर्पित करें।
  • अब आपको घी का दीपक प्रज्ज्वलित करना है।
  • पूजा के समय सुंदरकांड, रामायण या राम रक्षा स्त्रोत का पाठ जरूर करें।
  • दशहरा के दिन शस्त्र पूजन का काफी महत्व माना गया है। अगर आपके घर में कोई शस्त्र है तो उसका पूजन जरूर करें।
  • सबसे आखिर में आपको भगवान राम की आरती कर भूल चूक के लिए क्षमा मांगनी।

भगवान राम का भोग

भगवान राम को भोग में आप मौसमी फल अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा केसरिया खीर, बेसन के लड्डू और मालपुआ भी बेस्ट रहेगा। जब भोग लगा रहे हैं तो तुलसी दल का उपयोग जरूर करें। उसके बिना भोग अधूरा माना गया है।

दशहरा का नीलकंठ से संबंध (Dussehra 2025)

दशहरे के दिन का नीलकंठ से काफी खास कनेक्शन माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन नीलकंठ का दिखना काफी शुभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक रावण विजय से पहले भगवान राम को नीलकंठ के दर्शन हुए थे। इसी कारण से दशहरा पर नीलकंठ देखने की परंपरा चली आ रही है।

भगवान शिव से कनेक्शन

नीलकंठ का संबंध भगवान शिव से भी बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जो विश्व उत्पन्न हुआ था उसके पान के कारण शिवजी का गला नीला पड़ गया था। एक कथा के मुताबिक रावण वध के पश्चात भगवान राम ने ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए लक्ष्मण के साथ भोलेनाथ की पूजन की थी। उस समय भोलेनाथ ने उन्हें नीलकंठ के रूप में दर्शन दिए थे। यही कारण है कि दशहरा पर नीलकंठ के दर्शन करना बहुत शुभ माना गया है।

Diksha Bhanupriy
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Diksha Bhanupriy

10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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