Friday Special: शुक्रवार को करें ये काम , होगी अपार धन-संपदा की प्राप्ति

Friday Special: शुक्रवार का दिन शुक्र देव और माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन भावपूर्ण पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौंदर्य, वैभव और सफलता प्राप्त होती है। शुक्र देव और माँ लक्ष्मी की कृपा से सभी कार्य में सफलता प्राप्त होती है और जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है।
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Friday Special: शुक्रवार, सप्ताह का छठा दिन, देवी लक्ष्मी और ग्रह शुक्र का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शुक्र देव की पूजा करने से सुख, समृद्धि, सौंदर्य, वैभव और सफलता प्राप्त होती है। शुक्र देव को असुरों का गुरु भी कहा जाता है। वे प्रेम, सौंदर्य, कला, विलासिता और भोग-विलास के देवता हैं। शुक्रवार के दिन शुक्रदेव की पूजा के साथ साथ शुक्र कवच स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता हैं। आज हम आपको इस लेख के द्वारा बताएंगे की कैसे इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए और इसके क्या क्या लाभ होते हैं।

शुक्रवार के दिन शुक्र देव की पूजा कैसे करें:

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा स्थान को साफ करके, एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाएं।
शुक्र देव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
दीपक, धूप, नैवेद्य (दही, बूंदी, सफेद मिठाई), और फूल अर्पित करें।
इस स्तोत्र का 11, 21, या 108 बार ध्यानपूर्वक पाठ करें।
लक्ष्मी जी से धन-दौलत की वृद्धि और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
शुक्र देव से सुख-समृद्धि, सौंदर्य, वैभव और सफलता की प्रार्थना करें।
पूजा के बाद, प्रसाद ग्रहण करें।

।।शुक्र कवच।।

मृणालकुन्देन्दुषयोजसुप्रभं पीतांबरं प्रस्रुतमक्षमालिनम् ।

समस्तशास्त्रार्थनिधिं महांतं ध्यायेत्कविं वांछितमर्थसिद्धये ॥

ॐ शिरो मे भार्गवः पातु भालं पातु ग्रहाधिपः ।

नेत्रे दैत्यगुरुः पातु श्रोत्रे मे चन्दनदयुतिः ॥

पातु मे नासिकां काव्यो वदनं दैत्यवन्दितः ।

जिह्वा मे चोशनाः पातु कंठं श्रीकंठभक्तिमान् ॥

भुजौ तेजोनिधिः पातु कुक्षिं पातु मनोव्रजः ।

नाभिं भृगुसुतः पातु मध्यं पातु महीप्रियः॥

कटिं मे पातु विश्वात्मा ऊरु मे सुरपूजितः ।

जानू जाड्यहरः पातु जंघे ज्ञानवतां वरः ॥

गुल्फ़ौ गुणनिधिः पातु पातु पादौ वरांबरः ।

सर्वाण्यङ्गानि मे पातु स्वर्णमालापरिष्कृतः ॥

य इदं कवचं दिव्यं पठति श्रद्धयान्वितः ।

न तस्य जायते पीडा भार्गवस्य प्रसादतः ॥

।।शुक्र स्तोत्र।।

नमस्ते भार्गव श्रेष्ठ देव दानव पूजित ।

वृष्टिरोधप्रकर्त्रे च वृष्टिकर्त्रे नमो नम:।।

देवयानीपितस्तुभ्यं वेदवेदांगपारग:।

परेण तपसा शुद्ध शंकरो लोकशंकर:।।

प्राप्तो विद्यां जीवनाख्यां तस्मै शुक्रात्मने नम:।

नमस्तस्मै भगवते भृगुपुत्राय वेधसे ।।

तारामण्डलमध्यस्थ स्वभासा भसिताम्बर:।

यस्योदये जगत्सर्वं मंगलार्हं भवेदिह ।।

अस्तं याते ह्यरिष्टं स्यात्तस्मै मंगलरूपिणे ।

त्रिपुरावासिनो दैत्यान शिवबाणप्रपीडितान ।।

विद्यया जीवयच्छुक्रो नमस्ते भृगुनन्दन ।

ययातिगुरवे तुभ्यं नमस्ते कविनन्दन ।

बलिराज्यप्रदो जीवस्तस्मै जीवात्मने नम:।

भार्गवाय नमस्तुभ्यं पूर्वं गीर्वाणवन्दितम ।।

जीवपुत्राय यो विद्यां प्रादात्तस्मै नमोनम: ।

नम: शुक्राय काव्याय भृगुपुत्राय धीमहि ।।

नम: कारणरूपाय नमस्ते कारणात्मने ।

स्तवराजमिदं पुण्य़ं भार्गवस्य महात्मन:।।

य: पठेच्छुणुयाद वापि लभते वांछित फलम ।

पुत्रकामो लभेत्पुत्रान श्रीकामो लभते श्रियम ।।

राज्यकामो लभेद्राज्यं स्त्रीकाम: स्त्रियमुत्तमाम ।

भृगुवारे प्रयत्नेन पठितव्यं सामहितै:।।

अन्यवारे तु होरायां पूजयेद भृगुनन्दनम ।

रोगार्तो मुच्यते रोगाद भयार्तो मुच्यते भयात ।।

यद्यत्प्रार्थयते वस्तु तत्तत्प्राप्नोति सर्वदा ।

प्रात: काले प्रकर्तव्या भृगुपूजा प्रयत्नत:।।

सर्वपापविनिर्मुक्त: प्राप्नुयाच्छिवसन्निधि:।।

इस स्तोत्र का पाठ करने के लाभ

धन-दौलत में वृद्धि होती है, व्यवसाय में तरक्की होती है, घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है, विवाह में सफलता प्राप्त होती है, मान-सम्मान में वृद्धि होती है, व्यक्ति आकर्षक और सौंदर्यवान बनता है, कला और संगीत में रुचि बढ़ती है, नकारात्मकता दूर होती है, मन को शांति मिलती है।

(Disclaimer- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं के आधार पर बताई गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।)

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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