
देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। घर-घर में गणपति बप्पा की स्थापना होती है और हर कोई उनके स्वागत में पूरे मन से जुटा रहता है। ढोल-ताशों की गूंज, आरती की धुन और भक्तों की भीड़ पूरे वातावरण को भक्ति रस से भर देती है।
लेकिन बप्पा के आगमन जितना उत्साहजनक होता है, उतना ही भावुक क्षण उनका विसर्जन भी होता है। यह सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा वह पल है जब भक्त बप्पा को विदा करते हैं और अगले साल फिर आने का निमंत्रण देते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि गणेश प्रतिमा का विसर्जन कब और किस मुहूर्त में करना चाहिए।
गणेश विसर्जन का महत्व और धार्मिक मान्यता
1. क्यों किया जाता है विसर्जन?
गणेश प्रतिमा स्थापना से लेकर विसर्जन तक की परंपरा का गहरा धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि गणपति जी धरती पर भक्तों के घर आते हैं और दस दिन तक वहां निवास कर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। दसवें दिन प्रतिमा का विसर्जन कर उन्हें पुनः अपने लोक में विदा किया जाता है। यह प्रक्रिया प्रकृति और जीवन के चक्र का प्रतीक भी मानी जाती है।
2. कितने दिन बाद करना चाहिए विसर्जन?
परंपरागत रूप से गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक यानी दस दिनों तक गणेश जी की पूजा की जाती है। हालांकि कई लोग एक, तीन, पांच या सात दिन बाद भी विसर्जन कर देते हैं। पंचांग के अनुसार 2025 में गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को है और अनंत चतुर्दशी 5 सितम्बर को पड़ेगी। इस दिन बप्पा के विसर्जन का विशेष महत्व रहेगा।
3. शुभ मुहूर्त और ध्यान रखने योग्य बातें
विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त देखना बेहद जरूरी माना जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह से लेकर शाम तक कई शुभ काल रहेंगे, जिनमें प्रतिमा विसर्जन करना श्रेष्ठ रहेगा। विसर्जन के समय घर के सभी सदस्यों को मिलकर आरती करनी चाहिए और ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देनी चाहिए। साथ ही यह ध्यान रखना चाहिए कि पर्यावरण की रक्षा के लिए प्राकृतिक या मिट्टी की प्रतिमा का ही विसर्जन करें।

