कार्तिक मास का पूर्णिमा पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। यह वही दिन है जब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और देवी लक्ष्मी की कृपा भी इस दिन विशेष रूप से बनी रहती है। माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और जो भक्त पूरे श्रद्धा से उनका पाठ करता है, उसके जीवन में धन, सुख और समृद्धि का प्रवाह कभी नहीं रुकता।

पुराणों में उल्लेख है कि इस दिन की गई पूजा, दीपदान और लक्ष्मी पाठ हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है। यही कारण है कि इसे देव दीपावली भी कहा जाता है, जब पूरे आकाश में दीपों की ज्योति के साथ देवी-देवता पृथ्वी का सौंदर्य निहारते हैं।

क्यों खास होती है कार्तिक पूर्णिमा की रात? (Kartik Purnima 2025)

कार्तिक पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी पूर्णता पर होता है और यह दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात किए गए शुभ कर्म कई गुना अधिक फल देते हैं। यह दिन केवल भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना के लिए ही नहीं बल्कि शिव भक्तों के लिए भी अत्यंत पवित्र है। काशी, पुष्कर, हरिद्वार जैसे तीर्थों में इस रात दीपदान का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति कार्तिक पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी का पाठ करता है, उसके घर में सदैव अन्न, धन और सुख की वृद्धि होती रहती है।

मां लक्ष्मी का विशेष पाठ

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई मंत्र और स्तोत्र बताए गए हैं, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा की रात “श्री सूक्त पाठ” का विशेष महत्व है। यह पाठ न केवल धन की वृद्धि करता है बल्कि जीवन से दरिद्रता और क्लेश को भी दूर करता है।

कैसे करें श्री सूक्त पाठ

  • शाम को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजन स्थल पर सफेद या लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण कर दीपक जलाएं।
  • कमल पुष्प, चावल, और धूप अर्पित करें।
  • अब श्रद्धा पूर्वक ‘श्री सूक्त’ का पाठ करें।
  • पाठ के बाद देवी को खीर या पके हुए चावल का भोग लगाएं।
  • अंत में आरती करें और पूरे परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

श्री सूक्त पाठ

ओम हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्ण-रजत-स्त्रजाम्,
चन्द्रां हिरण्यमयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आवह।।
तां म आवह जात वेदो, लक्ष्मीमनप-गामिनीम्,
यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम्।।
अश्वपूर्वां रथ-मध्यां, हस्ति-नाद-प्रमोदिनीम्,
श्रियं देवीमुपह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम्।।
कांसोऽस्मि तां हिरण्य-प्राकारामार्द्रा ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीं,
पद्मे स्थितां पद्म-वर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्।।
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देव-जुष्टामुदाराम्,
तां पद्म-नेमिं शरणमहं प्रपद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणोमि।।
आदित्य वर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः,
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः।।
उपैतु मां दैव सखः, कीर्तिश्च मणिना सह,
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिं वृद्धिं ददातु मे।।
क्षुत्-पिपासाऽमला ज्येष्ठा, अलक्ष्मीर्नाशयाम्यहम्,
अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वान् निर्णुद मे गृहात्।।
गन्ध-द्वारां दुराधर्षां, नित्य-पुष्टां करीषिणीम्,
ईश्वरीं सर्व-भूतानां, तामिहोपह्वये श्रियम्।।
मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि,
पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः।।
कर्दमेन प्रजा-भूता, मयि सम्भ्रम-कर्दम,
श्रियं वासय मे कुले, मातरं पद्म-मालिनीम।।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि, चिक्लीत वस मे गृहे,
निच देवी मातरं श्रियं वासय मे कुले।।
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं, सुवर्णां हेम-मालिनीम्,
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो ममावह।।
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं, पिंगलां पद्म-मालिनीम्,
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो ममावह।।
तां म आवह जात-वेदो लक्ष्मीमनप-गामिनीम्,
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरूषानहम्।।
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा, जुहुयादाज्यमन्वहम्,
श्रियः पंच-दशर्चं च, श्री-कामः सततं जपेत्।।

दीपदान का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान का भी उतना ही महत्व है जितना लक्ष्मी पाठ का। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी के तट पर दीपदान करता है, उसके जीवन से दुख, रोग और कर्ज का अंधकार मिट जाता है। दीप जलाने के बाद मां लक्ष्मी से निवेदन करें कि आपके जीवन में सदैव प्रकाश, सुख और समृद्धि बनी रहे। दीपदान केवल पूजा का हिस्सा नहीं बल्कि यह एक ऊर्जा संतुलन प्रक्रिया है जो नकारात्मकता को दूर कर जीवन में सकारात्मकता भरती है।

घर में कार्तिक पूर्णिमा पर करें ये उपाय

1. लक्ष्मी जी के चरण चिह्न बनाएं
घर के मुख्य द्वार पर हल्दी या चंदन से मां लक्ष्मी के चरण बनाएं। इससे घर में स्थायी रूप से धन की वृद्धि होती है।

2. तिजोरी के पास दीप जलाएं
कार्तिक पूर्णिमा की रात तिजोरी या धन स्थान पर दीपक जलाने से वित्तीय स्थिरता आती है और अटकी हुई धनराशि मिलने के योग बनते हैं।

3. तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं
तुलसी के पौधे में दीपक जलाने से न केवल घर की नकारात्मकता दूर होती है बल्कि वैवाहिक जीवन में मधुरता भी बढ़ती है।

4. कन्याओं को खीर का प्रसाद दें
मां लक्ष्मी कन्या रूप में पूजनीय हैं। इस दिन कन्याओं को भोजन या खीर खिलाने से देवी की कृपा बढ़ती है।

कार्तिक पूर्णिमा का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष

वैज्ञानिक दृष्टि से कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का प्रभाव मानव मन पर सबसे अधिक होता है। इसलिए इस दिन ध्यान, पूजा या पाठ करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

आध्यात्मिक रूप से यह दिन देवताओं का पर्व है, जब ब्रह्मांड की ऊर्जा अपने सर्वोच्च स्तर पर होती है। ऐसे में मां लक्ष्मी की आराधना करने से आर्थिक उन्नति के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और संतोष प्राप्त होता है।

कार्तिक पूर्णिमा और धन लाभ योग

ज्योतिष के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की रात जब चंद्रमा वृषभ राशि में होता है, तब धन योग बनता है। इस रात किए गए पाठ, दान और दीपदान का फल कई गुना बढ़ जाता है। यदि आप धन हानि, कर्ज या व्यवसाय में रुकावट से परेशान हैं, तो इस दिन मां लक्ष्मी का नाम लेकर “ओं श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें। यह मंत्र धनागमन के सभी रास्ते खोल देता है।