7 सितंबर को साल का दूसरा चन्द्र ग्रहण, भारत में भी दिखेगा, राशियों पर कैसा रहेगा असर? जानें टाइम-सूतककाल और धार्मिक महत्व

जब सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है तो इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है, ऐसे में चंद्र ग्रहण लगता है।
chandra grahan 2026

7 सितंबर रविवार पूर्णिमा को साल का दूसरा चन्द्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा ऐसे में सूतक काल भी मान्य होगा।खास बात ये है कि इस बार पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर और समापन 21 सितंबर को होगा, ऐसे में पितृपक्ष में ग्रहण लगने का बड़ा महत्व माना जा रहा है। इससे पहले साल का पहला चन्द्र ग्रहण 14 मार्च होली पर लगा था।हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया था और ना ही सूतक काल मान्य हुआ था । आईए जानते है 7 सितंबर में लगने वाले ग्रहण के समय, तारीख और सूतककाल के साथ धार्मिक महत्व के बारें में…………

रविवार को लगेगा साल का दूसरा चन्द्र ग्रहण

  • ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को भाद्रपद्र की पूर्णिमा को लगेगा।इस तरह यह ग्रहण कुल 3 घंटे 29 मिनट तक रहेगा।
  • भारतीय समयानुसार ग्रहण 7 सितंबर को 9:57 मिनट से 8 सितंबर की रात 1:26 मिनट तक रहेगा।इसका सूतककाल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर शुरू हो जाएगा। चुंकी चन्द्र ग्रहण में सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है।
  • भारत के साथ ही फ्रांस, इग्लैंड,जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, अमेरिका और अफ्रीका पर भी देखाई देगा।
  • यह ग्रहण शनि की राशि कुंभ और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित होगाा।इस दौरान राहु चंद्रमा भी कुंभ में रहेंगे।

राशियों पर प्रभाव?

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह चंद्र ग्रहण मेष, वृष, मकर, कुंभ, कन्या और धनु राशि के जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है। इन लोगों को आकस्मिक धनलाभ,वाहन या प्रापर्टी क्रय विक्रय, आय में वृद्धि और नौकरीपेशा को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक  और मीन को संभलकर रहने की जरूरत है। सेहत पर बुरा प्रभाव, धनहानि और मानसिक तनाव और नौकरीपेशा को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

जानिए कब लगता है चन्द्र ग्रहण?

  1. चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।
  2. पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
  3. आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। चंद्रमा के धरती की तरफ वाले हिस्से पर धरती की छाया काली दिखाई देती है, कटा हिस्सा दिखाई देता है, तो वह इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हैं।
  4. उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान धरती की छाया का हल्का बाहरी भाग चंद्रमा की सतह पर पड़ता है। इस ग्रहण को देखना कुछ मुश्किल होता है।

ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?

  • ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
  • ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
  • ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
  • खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
  • ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
    बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
  • ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
    सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।

(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)

Pooja Khodani
लेखक के बारे में
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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