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14 या 15 फरवरी कब मनाई जाएगी महाशिवरात्रि? जानें पूजा विधि और जरूरी नियम

Written by:Diksha Bhanupriy
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शिवरात्रि के त्यौहार का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है। चलिए हम आपको यह व्रत कब है और किस तरह पूजन करनी है यह बता देते हैं।
14 या 15 फरवरी कब मनाई जाएगी महाशिवरात्रि? जानें पूजा विधि और जरूरी नियम

जैसे ही फाल्गुन का महीना शुरू होता है वैसे ही शिव भक्तों का उल्लास बढ़ जाता है। दरअसल, इस महीने में साल का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि पड़ता है। इसे बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

हिंदू पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस साल व्रत की तिथि को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है। इस बात का सामंजस है कि यह पर्व 14 तारीख को मनाया जाएगा या फिर 15 फरवरी को। चलिए हम आपको सही तारीख से लेकर पूजन विधि और इस बात से जुड़े कुछ बातें बताते हैं।

कब है महाशिवरात्रि?

पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 5:34 पर शुरू होगी। इसका समापन 16 फरवरी की शाम 6:04 पर होगा। ऐसे में 15 फरवरी के दिन मनाया जाने वाला है।

क्या है महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। ऐसा कहते हैं कि इस दिन भोलेनाथ ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे और पूरे जगत का कल्याण हुआ था। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है और शिव पूजन करता है उसे जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। कुंवारी कन्याएं यह व्रत मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए करती हैं।

कैसे करें पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • अब आपको शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और चीनी चढ़ाना है।
  • अब शुद्ध जल से भगवान का अभिषेक करें।
  • अभिषेक के पश्चात महादेव को बेलपत्र, शमी के पत्ते, धतूरा, भांग और सफेद चंदन अर्पित करें।
  • इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय का जाप जरूर करें।
  • अगर कर सकते हैं तो चारों प्रहर भगवान की विधिवत पूजा करें।
  • अब आखिर में आपको आरती कर पूजा का समापन करना होगा।
  • इस दौरान अपनी गलतियों के लिए महादेव से क्षमा ज़रूर मांगे।

इन नियमों का रखें ख्याल

महादेव की पूजन करते समय कभी भी तुलसी के पत्ते, केतकी के फूल या सिंदूर का प्रयोग नहीं किया जाता। जलधारी की कभी भी परिक्रमा नहीं की जाती है। जहां से जल बह रहा है वहां से लौट कर आ जाना चाहिए।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।